ईरान पर हमले से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में तनाव: वैश्विक तेल सप्लाई पर संकट के बादल
तेहरान । डेस्क: शनिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों ने मध्य पूर्व में युद्ध की लपटों को तेज कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है. ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य अपनी भौगोलिक बनावट में बेहद संकरा है, जिसकी चौड़ाई सबसे कम बिंदु पर मात्र 21 मील है और जहाजों के आने-जाने का रास्ता केवल 2 मील चौड़ा है, जिससे इसे अवरुद्ध करना रणनीतिक रूप से आसान हो जाता है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह मार्ग एक जीवन रेखा की तरह है क्योंकि दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. वर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन 20 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और ईंधन का परिवहन हुआ था, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में इसकी अपरिहार्यता को दर्शाता है.
इस तनावपूर्ण स्थिति का सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे ओपेक (OPEC) के दिग्गज सदस्य अपने अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात इसी मार्ग से करते हैं.
इसके अलावा, दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातकों में शुमार कतर अपना लगभग पूरा गैस निर्यात इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से भेजता है.
हालांकि, सऊदी अरब और यूएई ने हाल के दिनों में किसी भी अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए अपनी निर्यात क्षमता बढ़ा दी है और वे वैकल्पिक पाइपलाइनों के माध्यम से इस मार्ग को बायपास करने की कोशिश कर रहे हैं.
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन की अप्रयुक्त क्षमता वाली पाइपलाइनें उपलब्ध हैं, लेकिन यह कुल प्रवाह के मुकाबले काफी कम है.
वर्तमान में बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवां बेड़ा वाणिज्यिक शिपिंग की सुरक्षा में मुस्तैद है, लेकिन 1973 के तेल प्रतिबंध और 1980 के दशक के 'टैंकर युद्ध' जैसे ऐतिहासिक तनावों को देखते हुए ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है.