Indo-US Tread Deal: 12 फरवरी को 'भारत बंद' और देशव्यापी किसान प्रदर्शन
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार और अमेरिका के बीच हुए हालिया अंतरिम व्यापार समझौते ने भारतीय कृषि बाजारों में हड़कंप मचा दिया है. नई दिल्ली द्वारा अमेरिका से शुल्क मुक्त (ड्यूटी-फ्री) सोया तेल और 'डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन विद सॉल्युबल्स' (DDGS) के आयात को मंजूरी देने के बाद घरेलू स्तर पर सोयाबीन और मक्का की कीमतों में तेज गिरावट आई है.
पिछले एक सप्ताह में सोयाबीन के भाव 10% और मक्का के भाव 4% तक टूट चुके हैं. किसानों को डर है कि भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के बाजार में आने से स्थानीय फसल के दाम मिट्टी में मिल जाएंगे.
वर्तमान में मक्का की कीमत ₹1,820 प्रति क्विंटल के स्तर पर है, जो सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,400 से काफी नीचे है. रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन के बीच इस आयात नीति ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया है.
इस समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने गुरूवार, 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी 'भारत बंद' और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.
किसान नेता राकेश टिकैत ने इस समझौते को भारतीय खेती की कमर तोड़ने वाला कदम बताया है. इस हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि इसमें लगभग 30 करोड़ श्रमिकों और किसानों के शामिल होने का अनुमान है.
बंद के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, परिवहन सेवाओं और सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है. किसान संगठनों की मुख्य मांग है कि इस 'किसान विरोधी' व्यापार समझौते को तुरंत रद्द किया जाए और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी दी जाए.
ओडिशा, असम और केरल जैसे राज्यों में पूर्ण शटडाउन की आशंका जताई गई है, जबकि देश के 600 से अधिक जिलों में चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन की तैयारी है.