इंडिगो: पायलट कमी से उड़ानें रद्द, नए ड्यूटी नियमों ने उजागर की कमियां
नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में पीक ट्रैवल सीजन के दौरान हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हो गई है. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने पिछले सप्ताह हजारों उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. इस संकट की जड़ नई सरकारी दिशानिर्देश हैं, जो पायलटों के आराम और ड्यूटी घंटों को नियंत्रित करने के लिए लाए गए थे.
विमानन विशेषज्ञों और पायलट यूनियनों ने इंडिगो पर नियमों के लिए अपर्याप्त तैयारी का आरोप लगाया है, जिससे पायलटों की भारी कमी हो गई.
पिछले साल की शुरुआत में भारतीय सरकार ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (एफडीटीएल) नियम पेश किए, जो 1 नवंबर 2024 से पूरी तरह लागू हो गए. इन नियमों का उद्देश्य पायलटों की थकान प्रबंधन को मजबूत करना और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाना है.
मुख्य बदलावों में साप्ताहिक अनिवार्य आराम अवधि को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे करना शामिल है, लेकिन पायलट की व्यक्तिगत छुट्टी इस अवधि में नहीं गिनी जा सकती. रात्रिकालीन उड़ानों के लिए अधिकतम उड़ान घंटे 10 तक सीमित कर दिए गए हैं, जबकि आधी रात से सुबह के बीच लैंडिंग की संख्या प्रति सप्ताह दो से अधिक नहीं हो सकती. इसके अलावा, एयरलाइंस को हर तिमाही में पायलटों की थकान रिपोर्ट्स विमानन नियामक डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को जमा करनी होगी.
ये नियम अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन (आईसीएओ) और यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) जैसे वैश्विक मानकों से प्रेरित हैं. वर्षों से भारतीय पायलट यूनियनों, जैसे एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलपीए), ने लंबे और अनियमित घंटों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और सुरक्षा चिंताओं को उठाया था.
पूर्व एयरएशिया सीएफओ विजय गोपालन ने इंडिगो की 'लापरवाहीपूर्ण' तैयारी पर निशाना साधा, जबकि फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने दो साल की तैयारी के बावजूद हायरिंग फ्रीज और पायलट वेतन पर रोक जैसे कदमों को 'अल्पदृष्टि वाला' बताया.
भारत में पायलट बनना चुनौतीपूर्ण यात्रा है. एक अनाम कमर्शियल पायलट के अनुसार, एयरलाइन जॉइन करने से पहले ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन से कम से कम 200 उड़ान घंटे पूरे करने पड़ते हैं. जूनियर फर्स्ट ऑफिसर से शुरूआत कर, पर्याप्त अनुभव के बाद सीनियर बनते हैं और 3,000 घंटे उड़ान के बाद एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस (एटीपीएल) परीक्षा पास कर कप्तान का पद हासिल करते हैं.
हालांकि, वेतन वृद्धि मुश्किल है नए कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) धारकों को सालाना 4 लाख रुपये (लगभग 4,400 डॉलर) से शुरुआत मिलती है, जबकि सीनियर कप्तानों को 1 करोड़ रुपये (1,20,000 डॉलर) तक कमाई हो सकती है. पवन कहते हैं, "15 साल पुराने पायलट भी कहते हैं कि उनकी कमाई 10 साल पहले जितनी ही है, या शायद कम." लाभ सीमित हैं परिवार के लिए स्टाफ टिकट, सीमित मेडिकल इंश्योरेंस और लाइसेंस खोने पर मुआवजा.
विश्व स्तर पर तुलना करें तो भारत के नियम अन्य देशों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन वेतन में बड़ा अंतर है. ऑस्ट्रेलिया में साप्ताहिक आराम 48 घंटे और रात्रि ड्यूटी 9-10 घंटे सीमित है, पायलटों को सालाना 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (1,34,000 डॉलर) और कप्तानों को 4 लाख (2,68,000 डॉलर) तक मिलता है.
कनाडा में साप्ताहिक 36 घंटे आराम (होम बेस पर) और रात्रि ड्यूटी 8-10 घंटे, वेतन 38,000 से 2.5 लाख कैनेडियन डॉलर (27,740 से 1,82,500 डॉलर).
यूरोप में ईएएसए के तहत न्यूनतम 36 घंटे आराम (कम्पेंसेशन के साथ 24 तक), वेतन रोमानिया में 32,299 यूरो (35,000 डॉलर) से स्विट्जरलैंड में 1,13,672 यूरो (1,22,776 डॉलर). अमेरिका में साप्ताहिक 30 घंटे फ्री ड्यूटी और रात्रि 9-10 घंटे, मीडियन वेतन 1,98,100 डॉलर.
यह संकट भारतीय विमानन उद्योग की गहरी समस्याओं पायलटों की कार्य स्थितियां, वेतन स्थिरता और सुरक्षा प्राथमिकताओं को उजागर करता है. यूनियनों का कहना है कि एयरलाइंस को तत्काल भर्ती बढ़ानी चाहिए, ताकि यात्रियों की परेशानी कम हो और उड़ानें सुचारू रूप से चलें.