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DGCA के केबिन क्रू रेस्ट नियमों पर भड़कीं इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट

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12 फ़र. 2026, 03:12 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

इंडिगो एयरलाइँस
इंडिगो एयरलाइँस

नई दिल्ली । डेस्क: भारत की प्रमुख एयरलाइंस इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा प्रस्तावित केबिन क्रू के रेस्ट संबंधी नए नियमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) के माध्यम से इन विमानन कंपनियों ने नियामक को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि प्रस्तावित 'सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स' (CAR) वैश्विक मानकों की तुलना में कहीं अधिक सख्त हैं, जिससे परिचालन में लचीलापन खत्म हो जाएगा. 


अक्टूबर 2025 में जारी इस ड्राफ्ट पर एयरलाइंस का तर्क है कि थकान प्रबंधन के लिए 'फ्लाइट टाइम' के बजाय 'फ्लाइट ड्यूटी पीरियड' को मुख्य पैमाना बनाया जाना चाहिए.


एयरलाइंस ने विशेष रूप से लैंडिंग की संख्या और संचयी कैप पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है. 12 जनवरी को लिखे पत्र में एयरलाइंस ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क के अनुसार, थकान से रिकवरी पर्याप्त आराम के अवसर और जैविक घड़ी (circadian alignment) पर निर्भर करती है, न कि केवल ड्यूटी के घंटों पर. 


इसके अलावा, क्रू के ठहरने के लिए ट्विन-शेयरिंग रूम की अनुमति देने की भी वकालत की गई है. गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में इंडिगो में हुए भारी परिचालन व्यवधानों के पीछे पायलटों के लिए संशोधित FDTL नियमों का पालन न होना एक बड़ा कारण रहा था, जिसके बाद अब केबिन क्रू के नियमों पर यह खींचतान और बढ़ गई है.


गौरतलब है कि DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा प्रस्तावित नए नियम मुख्य रूप से केबिन क्रू की थकान कम करने और हवाई सफर को सुरक्षित बनाने के लिए तैयार किए गए हैं. इन नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव साप्ताहिक आराम (Weekly Rest) में है, जिसे 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे करने का प्रस्ताव है, ताकि क्रू को शारीरिक और मानसिक थकान से उबरने का पूरा समय मिले. 


साथ ही, रात की ड्यूटी के समय में भी बदलाव किया गया है; अब रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक की अवधि को 'नाइट ड्यूटी' माना जाएगा (पहले यह सुबह 5 बजे तक थी), जिससे क्रू को नींद के लिए एक घंटा अतिरिक्त मिल सकेगा.


आम आदमी के लिए इसे समझना सरल है. जैसे दफ्तर में काम के घंटों और छुट्टियों के नियम होते हैं, वैसे ही ये नियम तय करते हैं कि एक क्रू मेंबर लगातार कितनी उड़ानें भर सकता है और उसे अगली उड़ान से पहले कितना सो पाने का मौका मिलेगा. 


नए ड्राफ्ट में लैंडिंग की संख्या पर भी सीमा तय की गई है उदाहरण के लिए, अगर ड्यूटी 12 घंटे की है, तो लैंडिंग की संख्या सीमित कर दी गई है ताकि बार-बार के टेक-ऑफ और लैंडिंग के दबाव से क्रू न थके. 


इसके अलावा, लंबी दूरी की उड़ानों के बाद टाइम जोन के अंतर को देखते हुए 36 से 72 घंटे तक के अनिवार्य आराम और विमान के भीतर बेहतर 'रेस्ट सीट' या सोने की जगह देने का भी प्रावधान है. एयरलाइंस इसका विरोध इसलिए कर रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इन नियमों से उन्हें ज्यादा स्टाफ रखना पड़ेगा और उनके पुराने कामकाजी तरीके बदल जाएंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP