रिकॉर्ड रूसी तेल खरीद से भारत सुरक्षित
नई दिल्ली । डेस्क: भारत ने रूस से भारी मात्रा में रियायती कच्चे तेल की खरीद का एक नया रिकॉर्ड बनाया है. जून महीने में भारत के कुल मासिक तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) बैरल प्रति दिन के बराबर है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच रूस का सस्ता क्रूड ऑयल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण बन चुका है.
फिलहाल भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर स्थित विभिन्न बंदरगाहों, जैसे वाडिनार और विशाखापत्तनम, पर रूसी तेल से लदे कई टैंकर पहुंच रहे हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकॉर्ड तोड़ खरीद के पीछे दो मुख्य कारण हैं. पहला यह कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है, जिससे रूस अपने कच्चे तेल को घरेलू स्तर पर रिफाइन करने के बजाय बड़े पैमाने पर निर्यात करने को मजबूर हुआ है.
दूसरा कारण यह है कि चीन में आर्थिक सुस्ती के चलते वहां तेल की मांग में गिरावट आई है, जिसके कारण रूसी तेल का एक बड़ा हिस्सा भारत की तरफ डाइवर्ट हो गया है. इस समय भारत को प्रति बैरल 2 से 5 डॉलर तक की छूट मिल रही है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने जुलाई और अगस्त के मध्य तक का स्टॉक पहले ही सुरक्षित कर लिया है.
हालांकि, इस अल्पकालिक राहत के बावजूद विशेषज्ञों ने भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. 'अर्न्स्ट एंड यंग' (EY) के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत का 'रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व' (Strategic Petroleum Reserve) केवल 4.9 दिनों की खपत को पूरा कर सकता है, जो दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहद कम है. तुलनात्मक रूप से देखें तो चीन के पास 92.2 दिन, जापान के पास 77 दिन और दक्षिण कोरिया के पास लगभग 31 दिनों का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है.
साल 2000 में भारत की कच्चे तेल पर आयात निर्भरता जहां 70 प्रतिशत थी, वहीं आज देश की मांग दोगुनी से अधिक (54 लाख से 56 लाख बैरल प्रति दिन) होने के कारण यह निर्भरता बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति में किसी भी बड़े संकट या कीमतों में भारी उछाल से बचने के लिए भारत को अपने रणनीतिक तेल भंडार को तुरंत बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि घरेलू उत्पादन में लगातार आ रही गिरावट ने देश को विदेशी बाजारों और विशेष रूप से रूसी आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर बना दिया है.