एलन मस्क के आरोपों पर भारत का जवाब: सैटेलाइट इंटरनेट मंजूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष
नई दिल्ली । डेस्क: भारत सरकार ने देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की मंजूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी बताया है. यह प्रतिक्रिया अमेरिकी अरबपति एलन मस्क द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिना किसी का नाम लिए भारतीय बाजार में स्टारलिंक के प्रवेश को "कुछ उद्योगपतियों" द्वारा रोकने का आरोप लगाने के बाद आई है. मस्क ने दावा किया था कि एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक का रास्ता रोका जा रहा है.
दूरसंचार मंत्रालय ने इस पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा अनुमतियों के स्तर पर स्टारलिंक सहित सभी प्रमुख कंपनियां एक ही चरण में हैं. मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा मानकों की जांच प्रक्रिया सभी आवेदकों के लिए एक समान रूप से जारी है और प्रक्रिया को अनफेयर या भेदभावपूर्ण बताना पूरी तरह से बेबुनियाद है.
भारतीय दूरसंचार बाजार में मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो और सुनील मित्तल की भारती एयरटेल का वर्चस्व है. दोनों ही समूहों के सैटेलाइट प्रोजेक्ट्स को शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है और वे अंतिम स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार कर रहे हैं.
गौरतलब है कि स्टारलिंक पिछले चार वर्षों से भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सुरक्षा अनुमतियों और स्पेक्ट्रम वितरण नियमों के कारण प्रक्रिया लंबी खिंच गई है.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार आने वाले वर्षों में अरबों डॉलर का होने का अनुमान है.
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां भी स्टारलिंक को लेकर सतर्कता बरत रही हैं, क्योंकि बीते समय में देश के संवेदनशील इलाकों से अनधिकृत स्टारलिंक उपकरण बरामद हुए थे. सरकार ने साफ किया है कि देश की सुरक्षा और नियामकीय मानकों से समझौता किए बिना ही सेवाएं शुरू करने की अंतिम अनुमति दी जाएगी.