भारत में बाल विवाह में भारी कमी: रिपोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में बाल विवाह में उल्लेखनीय कमी देखी गई है. रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि 2019-21 के दौरान हर मिनट तीन बच्चे बाल विवाह का शिकार हो रहे थे, लेकिन अब पूरे दिन में केवल तीन मामले दर्ज किए जाते हैं. यह बदलाव कुछ साल पहले अकल्पनीय था, और अब बाल विवाह से संबंधित कानूनों के प्रति जागरूकता लगभग सर्वव्यापी हो गई है.
'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' नामक संगठन की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियों में बाल विवाह 69% और लड़कों में 72% कम हुआ है. यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक साइड इवेंट में जारी की गई, जिसका शीर्षक है 'टिपिंग पॉइंट टू जीरो: एविडेंस टुवर्ड्स ए चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया'.
रिपोर्ट में बताया गया कि 63% लोग अब बाल विवाह की शिकायत करने में "पूरी तरह सहज" महसूस करते हैं, जबकि 33% लोग "कुछ हद तक सहज" हैं. इसके अलावा, 99% उत्तरदाताओं ने भारत सरकार की 'बाल विवाह मुक्त भारत' पहल के बारे में सुना या देखा है, जो मुख्य रूप से गैर-सरकारी संगठनों, स्कूलों और पंचायतों के माध्यम से प्रचारित हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, असम में लड़कियों के बाल विवाह में 84% की कमी आई है, जो देश में सबसे अधिक है. इसके बाद महाराष्ट्र और बिहार (70% प्रत्येक), राजस्थान (66%) और कर्नाटक (55%) का स्थान है.
बाल विवाह को रोकने में गिरफ्तारी और एफआईआर को सबसे प्रभावी निवारक बताया गया है. यह उपलब्धि पिछले तीन वर्षों में भारत सरकार, राज्य सरकारों और नागरिक समाज संगठनों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है.
रिपोर्ट में शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं. सर्वेक्षण किए गए 757 गांवों में से 31% गांवों में 6-18 वर्ष की आयु की सभी लड़कियां स्कूल जा रही हैं. हालांकि, बिहार में यह आंकड़ा केवल 9% है, जबकि महाराष्ट्र में 51% है. लड़कियों की शिक्षा में बाधाओं के रूप में गरीबी (88%), बुनियादी ढांचे की कमी (47%), सुरक्षा (42%) और परिवहन की कमी (24%) को बताया गया है. बाल विवाह के कारणों में गरीबी (91%), नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा (44%) और परंपराएं व सामाजिक मानदंड शामिल हैं.
यह रिपोर्ट पांच राज्यों के 757 गांवों से एकत्रित डेटा पर आधारित है, जिन्हें भारत के विविध सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जोन-वार चुना गया था.
डेटा संग्रह के लिए मल्टीस्टेज स्ट्रैटिफाइड रैंडम सैंपलिंग का उपयोग किया गया. आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूल शिक्षकों, सहायक नर्स मिडवाइफ और पंचायती राज संस्थान के सदस्यों जैसे फ्रंटलाइन सेवा प्रदाताओं से गांव-स्तरीय जानकारी एकत्र की गई.
'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' के संस्थापक भुवन रिभु ने रिपोर्ट के लॉन्च के दौरान कहा, "भारत बाल विवाह को समाप्त करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. यह न केवल एक सतत विकास लक्ष्य की पूर्ति है, बल्कि यह दुनिया को यह दिखाने का प्रमाण है कि बाल विवाह का अंत संभव और अनिवार्य है."