भारत ने रूस से खरीदा 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी छूट का लाभ उठाते हुए भारतीय रिफाइनरों ने आनन-फानन में रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद लिया है. वाशिंगटन ने भारतीय कंपनियों को उन रूसी तेल जहाजों को खरीदने की अनुमति दी है, जिन पर 5 मार्च से पहले तेल लादा गया था.
वर्तमान में लगभग 13.8 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय समुद्र में मौजूद है, जिसे हासिल करने के लिए भारत और चीन के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है.
मिडल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे सऊदी अरब और इराक जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से भारत की आपूर्ति बाधित हो गई है.
इसी अनिश्चितता के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 119 डॉलर के शिखर से गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं.
हालांकि, अब रूसी तेल पहले की तरह डिस्काउंट पर नहीं, बल्कि 2 से 8 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर मिल रहा है. डेटा फर्म 'केपलर' के अनुसार, सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस संकट के समय में सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीदा है.
ऊर्जा संकट की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' लागू कर दिया है और 'प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026' के तहत गैस वितरण के लिए एक प्राथमिकता प्रणाली निर्धारित की है.
इस नए आदेश के तहत घरेलू उपभोक्ताओं, सीएनजी वाहनों और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (PNG) को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है, जिन्हें पूरी आपूर्ति मिलती रहेगी.
वहीं, उर्वरक संयंत्रों को 70 प्रतिशत, औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को 80 प्रतिशत और तेल रिफाइनरियों को 65 प्रतिशत गैस आपूर्ति से संतोष करना होगा.
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी घोषणा की है कि वह जामनगर परिसर से एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करेगी और केजी-डी6 बेसिन से निकलने वाली गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में डायवर्ट करेगी.
आगामी भीषण गर्मी में 270 गीगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग को देखते हुए सरकार का यह कदम देश को ब्लैकआउट और ईंधन की किल्लत से बचाने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है.