इबोला संकट के चलते भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन स्थगित
नई दिल्ली/किंशासा । डेस्क: अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तेजी से पैर पसार रहे इबोला वायरस के प्रकोप को देखते हुए अफ्रीकी संघ और भारत ने अगले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 'भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन' को फिलहाल स्थगित कर दिया है. भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह फैसला महाद्वीप पर उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए और सभी अफ्रीकी नेताओं व हितधारकों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है.
यह चिंताजनक फैसला ऐसे समय में आया है जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के दक्षिण किवू प्रांत में इबोला के पहले मामले की पुष्टि हुई है. यह इलाका रवांडा समर्थित एम23 (M23) विद्रोहियों के नियंत्रण में है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 10 करोड़ से अधिक की आबादी वाले इस विशाल मध्य अफ्रीकी देश में यह इबोला का 17वां प्रकोप है, जिसने अब तक 139 लोगों की जान ले ली है और लगभग 600 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं. डब्लूएचओ ने पहले ही इस स्थिति को एक अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है.
कांगो में जारी लंबे समय के आंतरिक संघर्षों, विशेषकर कांगो की सेना और एम23 विद्रोहियों के बीच जारी लड़ाई के कारण इस जानलेवा बीमारी को रोकने के प्रयास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. एम23 विद्रोही समूह के इतिहास में यह पहली बार है जब उसे इस तरह की गंभीर महामारी का प्रबंधन करना पड़ रहा है.
हालांकि, समूह ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन पूर्वी डीआरसी के घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में वायरस की मौजूदगी ने इस काम को बेहद जटिल बना दिया है. नया मामला बुकावु के प्रांतीय मुख्यालय के पास एक ग्रामीण इलाके में मिला है, जो फरवरी 2025 में विद्रोहियों के नियंत्रण में आया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस पिछले दो महीनों से उत्तरी प्रांत इतूरी में सक्रिय था और पिछले सप्ताह ही इसका पता चल पाया है. संक्रमण का शिकार हुआ 28 वर्षीय युवक किसानगानी शहर से आया था, जिसकी निदान की पुष्टि होने से पहले ही मौत हो गई.
इस बीच, पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है. युगांडा सरकार ने कांगो से आए एक संक्रमित व्यक्ति की मौत की पुष्टि की है, जिसके शव को दफनाने के लिए वापस भेज दिया गया है.
एहतियात के तौर पर युगांडा ने कांगो से आने-जाने वाली सभी उड़ानों को अगले 48 घंटों के लिए निलंबित कर दिया है. सरकार के प्रवक्ता एलन कसुज्जा ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश के भीतर इबोला का कोई सक्रिय मामला नहीं है.
इबोला का खतरा अब वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है. अमेरिका ने सुरक्षात्मक रुख अपनाते हुए कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन हफ्तों में डीआरसी, युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को केवल वाशिंगटन डलेस हवाई अड्डे के माध्यम से ही देश में लौटने की अनुमति होगी, जहां उनकी सघन स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाएगी.
सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पेरिस से डेट्रॉइट जा रही एयर फ्रांस की एक फ्लाइट को सिर्फ इसलिए मॉन्ट्रियल की तरफ मोड़ दिया गया क्योंकि उसमें डीआरसी का एक यात्री 'गलती से' सवार हो गया था.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता अमेरिकी जनता की सुरक्षा करना और इबोला को अमेरिका पहुंचने से रोकना है, जबकि दूसरी प्राथमिकता प्रभावित देशों की मदद करना है ताकि इस वायरस के प्रसार को रोका जा सके.
संकट के इस दौर में जमीनी स्तर पर काम कर रहे चिकित्साकर्मियों ने बुनियादी दवाओं और सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी की शिकायत की है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका सहित बड़े अंतरराष्ट्रीय दाताओं द्वारा विदेशी सहायता में की गई कटौती को माना जा रहा है.