यूरोप में US सैन्य विमानों की अचानक बढ़ी हलचल से अटकलें तेज
बीजिंग । डेस्क: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब यूरोप में अमेरिकी वायुसेना की असामान्य और भारी हलचल ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. रक्षा क्षेत्र की प्रमुख वेबसाइट 'द वॉर ज़ोन' (TWZ) और 'यूके डिफेंस जर्नल' की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के कुख्यात '160th स्पेशल ऑपरेशंस एविएशन रेजिमेंट' (नाइटस्टॉकर्स) से जुड़े C-17 ग्लोबमास्टर कार्गो जेट, AC-130J गनशिप और गुप्त टोही विमान बड़ी संख्या में ब्रिटेन और जर्मनी के सैन्य अड्डों पर पहुंच रहे हैं.
सैन्य विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर विमानों की इस तैनाती को भविष्य के किसी बड़े 'स्पेशल ऑपरेशन' का संकेत माना जा रहा है.
अटकलें हैं कि यह भारी तैनाती या तो मध्य पूर्व में किसी संभावित हमले की तैयारी है या फिर रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर 'मैरिनेरा' को रोकने का मिशन.
हालांकि, सबसे ज्यादा चिंता ग्रीनलैंड को लेकर जताई जा रही है, क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष सहयोगी स्टीफन मिलर ने सीएनएन को दिए साक्षात्कार में दावा किया है कि ग्रीनलैंड कानूनी रूप से अमेरिका का है और अमेरिका जब चाहे इस पर कब्जा कर सकता है.
ग्रीनलैंड पर कब्जे की इन धमकियों ने यूरोपीय देशों में हड़कंप मचा दिया है.
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी अमेरिकी कब्जे का मतलब नाटो (NATO) सैन्य गठबंधन का अंत होगा.
इस बीच, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली समेत कई यूरोपीय देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला केवल वहां के लोग और डेनमार्क ही कर सकते हैं.
चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर वेनेजुएला में की गई कार्रवाई ने यूरोप को डरा दिया है, और अब यूरोपीय देश अपनी संप्रभुता को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
फिलहाल, ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड और माइल्डनहॉल एयरबेस पर अमेरिकी विशेष बलों की मौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका अब आर्कटिक क्षेत्र में कोई नया मोर्चा खोलने की तैयारी में है.