जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू
नई दिल्ली । डेस्क: नगद कांड में आरोपी दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ी है. सोमवार को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 200 से अधिक सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया.
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही न्यायाधीश को हटाने की दिशा में कदम उठाया है.
लोकसभा में 145 सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को महाभियोग का ज्ञापन सौंपा, जबकि राज्यसभा के 63 सांसदों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया.
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, सीपीएम जैसे विपक्षी दलों के साथ-साथ बीजेपी, टीडीपी, जेडी(यू) और जेडी(एस) जैसे एनडीए सांसदों ने भी इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये. हस्ताक्षर करने वालों में बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और एनसीपी (शरद) की सुप्रिया सुले शामिल हैं.
संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत महाभियोग प्रक्रिया शुरू होगी, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगी. इससे पहले, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की थी.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4) और 218 के अनुसार, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिये संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है. इसके लिये लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं.
यदि प्रस्ताव दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित होता है, तो लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा सभापति मुख्य न्यायाधीश से तीन सदस्यीय जांच समिति गठन का अनुरोध करेंगे. इस समिति में सुप्रीम कोर्ट का एक वर्तमान न्यायाधीश, हाई कोर्ट का एक मुख्य न्यायाधीश और सरकार द्वारा नामित एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होंगे. समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति अंतिम निर्णय लेंगी.
इस साल होली के दिन न्यायाधीश वर्मा के आवास के गोदाम में आग लगी थी. दमकलकर्मियों ने आग बुझाने के दौरान आधे जले नोटों के ढेर बरामद किए थे.
इसके बाद विवाद शुरू हुआ. पहले बर्मा को दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरित किया गया.
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां तीन न्यायाधीशों की जांच समिति गठित की गई. मई में समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कई गवाहों ने वर्मा के आवास में नकदी के ढेर देखे थे, हालांकि वर्मा ने इससे अनभिज्ञता जताई.