जनरल नरवणे की किताब में उलझा प्रकाशक पेंग्विन
राहुल गांधी के पास जनरल नरवणे की किताब कैसे पहुंची? प्रकाशक के दावे ने खड़ा किया बड़ा सवाल
नई दिल्ली । डेस्क: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) को लेकर एक बड़ा रहस्य गहरा गया है. इस पुस्तक के आधिकारिक प्रकाशक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह किताब अभी छपी ही नहीं है. हालांकि पेंग्विन का यह दावा उसके खुद के उस बयान से अलग है, जिसमें 2023 में उसने किताब प्रकाशित होने और उसका प्री-ऑर्डर लेना शुरु किया था.
अब पेंगुइन रैंडम हाउस ने कहा है कि इस पुस्तक के विशेष प्रकाशन अधिकार केवल उनके पास हैं और अभी तक यह किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है. प्रकाशक ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि, "इस पुस्तक की कोई भी प्रति चाहे वह प्रिंट रूप में हो या डिजिटल कंपनी द्वारा अभी तक सार्वजनिक रूप से जारी, वितरित या बेची नहीं गई है."
Hello friends. My book is available now. Just follow the link. Happy reading. Jai Hind pic.twitter.com/VCiLiZOWIi
— Manoj Naravane (@ManojNaravane) December 15, 2023
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले सप्ताह संसद परिसर में राहुल गांधी को इस पुस्तक की एक हार्डकवर प्रति (Hardcover Copy) लहराते हुए देखा गया था. उन्होंने लोकसभा में इस किताब के अंशों को उद्धृत करने की कोशिश की थी, लेकिन प्रकाशक के ताजा बयान के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि जब किताब छपी ही नहीं, तो राहुल गांधी के हाथ में कौन सी पुस्तक थी? पेंगुइन इंडिया ने चेतावनी दी है कि वर्तमान में किसी भी रूप (PDF या प्रिंट) में प्रसारित हो रही सामग्री कॉपीराइट का उल्लंघन है और पूरी तरह अनधिकृत है.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में पहले ही एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है. जांच इस बात पर केंद्रित है कि एक ऐसी पांडुलिपि (Manuscript), जिसे अभी तक रक्षा मंत्रालय से अनिवार्य मंजूरी नहीं मिली है, वह डिजिटल प्रारूप में कैसे लीक हुई. पुलिस के अनुसार, कुछ वेबसाइटों पर इस किताब की पीडीएफ प्रतियां उपलब्ध पाई गई हैं.
ऐसे में सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि क्या राहुल गांधी के पास मौजूद किताब इसी 'अनधिकृत लीक' का हिस्सा है या वह केवल एक डमी प्रति थी? प्रकाशक ने साफ कर दिया है कि बाजार या किसी भी व्यक्ति के पास मौजूद इस पुस्तक की कोई भी प्रति अवैध है. अब दिल्ली पुलिस की जांच ही यह साफ कर पाएगी कि यह 'अप्रकाशित' जानकारी राजनीतिक गलियारों तक कैसे पहुंची.