चीन कैसे अपने नागरिकों को वापस गरीबी में जाने से रोकता है?
बीजिंग । डेस्क: चीन ने साल 2021 में देश से अत्यधिक गरीबी को ऐतिहासिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार के लिए असली चुनौती इस उपलब्धि को बनाए रखना है. चीनी प्रशासन इस वास्तविकता से भली-भांति परिचित है कि एक गंभीर बीमारी, प्राकृतिक आपदा या शिक्षा पर होने वाला अचानक खर्च किसी भी परिवार को दोबारा गरीबी के दलदल में धकेल सकता है. इसी 'बैकस्लाइडिंग' या वापसी को रोकने के लिए चीन ने 2021 से 2025 तक का एक पांच वर्षीय 'संक्रमण काल' निर्धारित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीबी उन्मूलन से मिले लाभों को स्थायी बनाना और ग्रामीण पुनरुद्धार को बढ़ावा देना है.
इस रणनीति की सफलता का एक सटीक उदाहरण इनर मंगोलिया की किसान वांग शुहे की कहानी है. साल 2024 में जब उनके पति को ल्यूकेमिया हुआ और उसी समय बेटी के कॉलेज की फीस का बोझ पड़ा, तो सरकार के 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' ने तुरंत इस संकट को पहचान लिया. उन्हें न केवल स्वास्थ्य कवरेज और ट्यूशन सब्सिडी दी गई, बल्कि आय बहाली के लिए दो गायें भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे परिवार आर्थिक रूप से टूटने से बच गया.
चीन की इस सुरक्षा प्रणाली के चार मुख्य स्तंभ हैं. पहला, जमीनी स्तर पर एक सक्रिय निगरानी तंत्र काम करता है. गांव के कार्यकर्ता और सरकारी टीमें नियमित रूप से घरों का दौरा करती हैं ताकि आय और खर्चों का हिसाब रखा जा सके. यदि किसी परिवार का चिकित्सा खर्च अचानक बढ़ता है या रोजगार छिन जाता है, तो डेटा साझाकरण के जरिए प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है.
दूसरा, संकट के समय केवल वित्तीय मदद ही नहीं, बल्कि एक संपूर्ण 'टूलकिट' प्रदान की जाती है. जहां तात्कालिक राहत के लिए आवास सुरक्षा और चिकित्सा सहायता दी जाती है, वहीं काम करने में सक्षम परिवारों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ा जाता है ताकि वे दोबारा आत्मनिर्भर हो सकें.
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू सहायता को स्थायी कमाई में बदलना है. चीन अब केवल एकमुश्त सब्सिडी देने के बजाय स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है. ग्रामीण परिवारों को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर उनके लिए आय के स्थिर स्रोत बनाए जा रहे हैं. स्थानीय स्तर पर कार्यशालाएं खोलकर और अन्य क्षेत्रों में नौकरियों के साथ मिलान करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परिवारों के पास प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता हो.
चौथा स्तंभ क्षेत्रीय असमानता को कम करना है. चीन के समृद्ध पूर्वी प्रांत अब पश्चिमी और पहाड़ी क्षेत्रों के साथ साझेदारी कर रहे हैं. यह साझेदारी केवल धन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेषज्ञता साझा करने पर आधारित है. पूर्वी क्षेत्रों के डॉक्टर, शिक्षक और प्रबंधक पिछड़े इलाकों में जाकर स्थानीय टीमों को प्रशिक्षित कर रहे हैं. साथ ही, इन क्षेत्रों के कृषि उत्पादों के लिए बड़े शहरों में बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं. अंततः, चीन का लक्ष्य केवल गरीबी राहत नहीं, बल्कि एक ऐसा त्वरित और लचीला सुरक्षा जाल तैयार करना है जो किसी भी झटके को झेल सके.