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हॉर्मुज: ईरान-अमेरिका के दावों और हकीकत के बीच उलझा संघर्ष

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03 सित. 2026, 06:58 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य

नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' पर वर्चस्व की जंग में बदल चुका है. पिछले छह महीनों से जारी युद्ध के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर पूर्ण नियंत्रण को लेकर वाशिंगटन और तेहरान, दोनों ही पक्ष परस्पर विरोधी दावे पेश कर रहे हैं. जहाँ एक तरफ अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह समुद्री मार्ग अब काफी हद तक सुरक्षित है और यहाँ से बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन शुरू हो चुका है, वहीं ईरान का रुख इसके बिल्कुल विपरीत है. 


तेहरान का स्पष्ट कहना है कि इस जलमार्ग पर केवल उसकी अनुमति से ही जहाजों की आवाजाही हो सकती है और बिना अनुमति गुजरने वाले पोतों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है.


अमेरिका का दावा: समुद्री मार्ग साफ और नौवहन में बढ़ोतरी


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में रोजाना दर्जनों तेल टैंकर और व्यापारिक पोत इस मार्ग से सुरक्षित निकल रहे हैं. अमेरिकी सेना के मध्य कमान (CENTCOM) का कहना है कि उसने जलमार्ग से समुद्री बारूदी सुरंगों (समुद्री माइंस) को हटाकर रास्तों को पूरी तरह साफ कर दिया है. 


अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन 15 से 18 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति इस जलडमरूमध्य के जरिए हो रही है. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नौसैनिक सुरक्षा मिलने के बाद से हॉर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है.


ईरान का रुख: जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण और जहाजों को चेतावनी


दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए चेतावनी जारी की है. ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि दुश्मन कुछ जहाजों को निकालने में कामयाब रहा है, लेकिन हॉर्मुज पर मुख्य नियंत्रण अभी भी ईरानी सशस्त्र बलों का ही है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग का झूठा आश्वासन दे रहा है. 


ईरान का दावा है कि उसकी निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करने वाले कई तेल टैंकर पहले ही समुद्री माइंस की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. इस बीच क्षेत्रीय तनाव तब और बढ़ गया जब सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर हुए हमले में दो नाविकों की जान चली गई.


स्वतंत्र डेटा: अमेरिकी दावों से अलग है जमीनी हकीकत


इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आता है जब स्वतंत्र समुद्री डेटा और जहाज-ट्रैकिंग एजेंसियों के आंकड़ों की समीक्षा की जाती है. 'केपलर' (Kpler) और 'लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस' जैसी प्रतिष्ठित विश्लेषण संस्थाओं की रिपोर्ट अमेरिकी आंकड़ों से काफी भिन्न तस्वीर पेश करती हैं. 


समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की दैनिक संख्या 10 से 15 के बीच ही सिमटी हुई है, जो युद्ध-पूर्व के 100 जहाजों के औसत से बेहद कम है. 'जॉइंट मरीन इंफॉर्मेशन सेंटर' ने भी इस क्षेत्र में नौवहन जोखिम को 'अत्यंत गंभीर' श्रेणी में रखा है और बारूदी सुरंगों के खतरे की पुष्टि की है.


आंकड़ों में अंतर का कारण: तकनीकी पहलू और साइलेंट शिप्स


अमेरिकी दावों और जमीनी आंकड़ों के बीच इस बड़े अंतर के पीछे विशेषज्ञ दो मुख्य कारण मानते हैं. पहला तकनीकी कारण यह है कि कई जहाजों ने हमले के डर से अपने ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर रखे हैं, जिससे वे सामान्य डेटा में दर्ज नहीं हो पाते. 


इसके अलावा, अमेरिकी सेना अपने आंकड़ों में नौसेना के सहायक पोतों, टगबोटों और छोटे तटीय जहाजों को भी शामिल कर रही है, जिन्हें स्वतंत्र ट्रैकिंग एजेंसियां मालवाहक जहाजों की श्रेणी में नहीं गिनती हैं.


भविष्य की राह: मनोवैज्ञानिक युद्ध और वैश्विक चिंताएं


सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य नियंत्रण के अलावा यह दोनों देशों के बीच एक बड़ा मनोवैज्ञानिक युद्ध भी है. युद्ध के छह महीनों बाद दोनों ही देश दुनिया के सामने इस वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग पर अपनी पकड़ को मजबूत दिखाना चाहते हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों पक्षों को बयानबाजी की जगह संयम बरतने की जरूरत है, क्योंकि हॉर्मुज में जरा सी भी लापरवाही वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP