सत्ता परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा हिमालयी राष्ट्र, नेपाल
काठमांडू । डेस्क: नेपाल में पिछले साल हुए ऐतिहासिक युवा विद्रोह और तत्कालीन सरकार के पतन के बाद गुरुवार को देश की नई दिशा तय करने के लिए संसदीय चुनाव का आगाज़ हो गया है. सितंबर 2025 में हुए हिंसक प्रदर्शनों के करीब छह महीने बाद, जिसमें 77 लोगों की जान गई थी, नेपाल के करीब 1.9 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपनी नई संसद चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं.
इस चुनाव को देश के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह एक अंतरिम प्रशासन के कार्यकाल के बाद हो रहा है. मतदान प्रक्रिया सुबह 7 बजे (01:30 GMT) से शुरू होकर शाम 5 बजे (11:30 GMT) तक चलेगी.
देशभर में 23,000 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ लोग हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर दक्षिण के मैदानी इलाकों तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. सरकार ने मतदान को सुचारू बनाने और लोगों को अपने पैतृक घरों तक पहुँचने के लिए तीन दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है, जिससे बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाताओं के भाग लेने की उम्मीद है.
इस बार चुनाव में कुल 1.89 करोड़ मतदाता हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें लगभग 8 लाख नए युवा मतदाता शामिल हुए हैं.
आंकड़ों के अनुसार, मतदाताओं में 9.66 मिलियन पुरुष और 9.24 मिलियन महिलाएं शामिल हैं.
साल 2022 के पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार मतदाताओं की संख्या में करीब दस लाख की वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य श्रेय युवाओं में राजनीति के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को दिया जा रहा है.
नेपाल की मिश्रित चुनावी प्रणाली के तहत कुल 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा के लिए चुनाव हो रहे हैं. इनमें से 165 सदस्यों को मतदाता सीधे चुनेंगे, जबकि शेष 110 सीटों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से भरा जाएगा.
मुख्य मुकाबला नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (यूएमएल) जैसी पारंपरिक शक्तियों और काठमांडू के पूर्व मेयर व पूर्व रैपर बालेंद्र शाह की अगुवाई वाली नई 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' के बीच है.
चुनाव आयोग के मुताबिक सीधे निर्वाचित होने वाली 165 सीटों के परिणाम मतदान के दो दिनों के भीतर आने की संभावना है, जबकि पूर्ण परिणाम में दो से तीन दिन अतिरिक्त लग सकते हैं.