हाईकोर्ट अपने आप में संवैधानिक अदालतें हैं- SC
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की सुरक्षा को बेहद जरूरी बताया है. शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि झारखंड जैसे राज्यों के पास समृद्ध प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनका संरक्षण हर हाल में किया जाना चाहिए.
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के फैसलों में वे आसानी से हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
यह पूरा मामला वन क्षेत्रों के पास पत्थर खनन और स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति से जुड़ा है.
दरअसल, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक नोटिफिकेशन जारी कर जंगलों के आसपास खनन की न्यूनतम दूरी को 400-500 मीटर से घटाकर सिर्फ 250 मीटर कर दिया था. इसके खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहले 1 किलोमीटर और बाद में खनन के लिए 500 मीटर व क्रशर के लिए 400 मीटर का बफर जोन तय कर दिया.
बोर्ड इसी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां उसने दलील दी कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों से सारा काम ठप हो गया है.
इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूरी के नियमों में अचानक कटौती की गई थी.
जब बोर्ड के वकील ने हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों का हवाला दिया, तो शीर्ष अदालत ने बेहद तल्ख और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, "हम अपने हाईकोर्ट्स का मनोबल नहीं गिरा सकते. हम कोई हेडमास्टर नहीं हैं जो हाईकोर्ट को सलाह दें कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं. हाईकोर्ट अपने आप में संवैधानिक अदालतें हैं."
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख और याचिका में दखल देने से इनकार के बाद, याचिकाकर्ता प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को याचिका वापस लेने की मंजूरी दे दी और साथ ही यह छूट भी दी कि वे हाईकोर्ट में होने वाली अंतिम सुनवाई के दौरान अपनी सभी दलीलों को मजबूती से रख सकते हैं.