रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

हाईकोर्ट का फैसला: सार्वजनिक भूमि पर नमाज का विशेष अधिकार नहीं

C

CG Khabar

02 मई 2026, 07:39 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

हाईकोर्ट
हाईकोर्ट

प्रयागराज । डेस्क: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भूमि पर धार्मिक गतिविधियों के आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सार्वजनिक भूमि का उपयोग किसी व्यक्ति या समूह द्वारा विशेष रूप से नमाज जैसी धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता है. 


न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने संभल जिले के एक निवासी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति पर सभी नागरिकों के समान अधिकार होते हैं और इसका एकतरफा उपयोग कानूनी रूप से मान्य नहीं है.

विज्ञापन


अदालत ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण नहीं है और यह सार्वजनिक व्यवस्था तथा दूसरों के अधिकारों के अधीन है. हाईकोर्ट ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजी परिसरों में की जाने वाली धार्मिक गतिविधियों को संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि निजी स्थान को बिना किसी नियमन के नियमित सामूहिक सभाओं के केंद्र में बदल दिया जाए. 


कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब ऐसी गतिविधियां सार्वजनिक क्षेत्र को प्रभावित करने लगती हैं, तो राज्य का हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है.


पीठ ने यह भी पाया कि इस मामले में याचिकाकर्ता किसी पुरानी परंपरा को बचाने के बजाय एक नई प्रथा शुरू करने की कोशिश कर रहा था, जिससे बाहरी लोगों की भीड़ जुटने की संभावना थी. 


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सार्वजनिक भूमि का अवैध रूप से हस्तांतरण कर वहां नमाज पढ़ने की मांग की जाती है, तो ऐसा विक्रय विलेख अवैध माना जाएगा और वह कानून में टिकने योग्य नहीं होगा. अदालत ने अंत में दोहराया कि राज्य के पास उन गतिविधियों को विनियमित करने का पूरा अधिकार है जो स्थापित परंपराओं से हटकर सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP