अब 'एनर्जी ड्रिंक' नाम से नहीं बिकेंगे हाई कैफीन पेय
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में कैफीन युक्त पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है. खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पेप्सी, रेड बुल, मॉन्स्टर बेवरेज, रिलायंस और हेल एनर्जी जैसे प्रमुख ब्रांड्स को निर्देश दिया है कि वे अपने उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों से "एनर्जी ड्रिंक" शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें.
नियामक ने कंपनियों को इस बदलाव को लागू करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा दी है. FSSAI का स्पष्ट मानना है कि भारतीय खाद्य नियमों में "एनर्जी ड्रिंक" नाम की कोई आधिकारिक श्रेणी मौजूद नहीं है और इस तरह के पेय पदार्थों द्वारा "शरीर और दिमाग को ऊर्जावान बनाने" या "कमजोरी दूर करने" जैसे दावे भ्रामक श्रेणी में आते हैं.
FSSAI के इस कड़े रुख के बाद देश के तेजी से बढ़ते एनर्जी ड्रिंक बाजार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है. पेप्सी की 'स्टिंग', रिलायंस की 'कैम्पा एनर्जी' और 'रेड बुल' जैसे पेय पदार्थ आज भारतीय युवाओं और कम आय वाले वर्ग में काफी लोकप्रिय हैं.
ये कंपनियां अक्सर विज्ञापनों में बिजली की फुर्ती और असीमित ऊर्जा का दावा करती रही हैं. हालांकि, इन ड्रिंक्स में कैफीन, शुगर और टौरिन की अत्यधिक मात्रा को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा लगातार चिंता जताई जाती रही है.
इसी वजह से राजस्थान सरकार ने हाल ही में अपने राज्य में ऐसी ड्रिंक्स की हजारों बोतलें जब्त की हैं और अमेज़ॅन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी इन्हें "एनर्जी ड्रिंक" के रूप में सूचीबद्ध करने से रोक दिया है.
दूसरी ओर, पेय निर्माता कंपनियां और इंडियन बेवरेज एसोसिएशन इस फैसले से असहज नजर आ रहे हैं. कंपनियों को डर है कि एक स्थापित पहचान छिन जाने से उनके ब्रांड और बिक्री को बड़ा नुकसान हो सकता है. एसोसिएशन ने FSSAI को एक गोपनीय पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि ऐसे महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव से पहले उद्योग के हितधारकों के साथ परामर्श किया जाना चाहिए.
उनका तर्क है कि परामर्श से भ्रम और कानूनी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी. हालांकि, नियामक अधिकारियों ने कंपनियों की इन चिंताओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य और सही जानकारी सबसे ऊपर है और अगर कंपनियों को इस आदेश से कोई आपत्ति है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन उच्च कैफीन वाले पेय पदार्थों पर नकेल कसी जा रही है. इंग्लैंड में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ये ड्रिंक्स बेचने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है, वहीं पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में इन्हें अनिवार्य रूप से "स्टिमुलेंट ड्रिंक्स" यानी उत्तेजक पेय का नाम दिया गया है.
भारत में 2017 में पेप्सी द्वारा सस्ते दामों पर 'स्टिंग' लॉन्च करने के बाद से इस बाजार में भारी उछाल आया था. Euromonitor के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का यह बाजार 2028 तक $1.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. लेकिन FSSAI के इस कड़े फैसले के बाद अब कंपनियों को अपनी मार्केटिंग रणनीतियों में बड़ा फेरबदल करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.