विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से भारतीय बाजार में हड़कंप
नई दिल्ली । डेस्क: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा निकासी का दौर जारी है. मई की शुरुआत में ही विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगभग 14,231 करोड़ रुपये की पूंजी निकाल चुके हैं.
बाजार में मची इस उथल-पुथल का सीधा असर देश की सबसे मूल्यवान 10 कंपनियों पर पड़ा है, जिनमें से चार के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में करीब एक लाख करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट की सबसे ज्यादा मार सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) पर पड़ी है.
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 के शुरुआती महीनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग दो लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं, जो कि साल 2025 की कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी के आंकड़े को भी पार कर गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो इस साल के अंत तक यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच सकता है. इस साल केवल फरवरी को छोड़कर, जिसमें निवेशकों ने 22,615 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी, बाकी सभी महीनों में विदेशी संस्थाएं शुद्ध विक्रेता बनी रही हैं.
गौरतलब है कि मार्च में युद्ध की स्थितियों के बीच रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये और अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये की निकासी की गई थी.
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारत में ईंधन के दामों में उछाल के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को डरा दिया है.
इसके अतिरिक्त, अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में बढ़ता रिटर्न और भारतीय बाजार की तुलना में चीनी बाजार में शेयरों की कम कीमतें विदेशी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, जिसके चलते वे भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं.