यूरोप में गर्मी का तांडव, दर्जनों मरे
नई दिल्ली । डेस्क: पूरा पश्चिमी यूरोप इस समय एक अभूतपूर्व और जानलेवा लू की चपेट में है. जून के महीने में ही प्रकृति के इस रौद्र रूप ने गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. इस चरम मौसम और भीषण गर्मी के कारण अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, बिजली आपूर्ति ठप हो गई है, और इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर स्कूलों और सांस्कृतिक स्थलों को बंद करना पड़ा है.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों में सरकारों ने रेड अलर्ट जारी कर लोगों को घरों में रहने और अपनी दिनचर्या बदलने की सख्त हिदायत दी है.
ब्रिटेन और फ्रांस में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड:
ब्रिटेन के मौसम विभाग (मेट ऑफिस) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने महज एक दिन पहले बने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए जून के इतिहास का सबसे गर्म दिन दर्ज कराया. मौसम विभाग ने रेड हीट अलर्ट को लगातार आगे बढ़ाया है.
यह ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार है जब लगातार तीन दिनों तक ऐसा गंभीर रेड अलर्ट जारी रखना पड़ा है. मुख्य मौसम विज्ञानी एंडी पेज ने चेतावनी दी है कि इस अत्यधिक गर्मी से दैनिक जीवन में बड़ा व्यवधान आना तय है, इसलिए नागरिक सुरक्षित रहने के लिए हर संभव उपाय करें.
दूसरी ओर, फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थिति और भी भयावह हो चुकी है, जहां तापमान 40.9 डिग्री सेल्सियस (105.6 डिग्री फारेनहाइट) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है. फ्रांस ने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को उच्चतम स्तर पर सक्रिय कर दिया है, ताकि अस्पतालों में केवल गर्मी से प्रभावित लोगों के आपातकालीन इलाज पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.
इसके लिए अस्पतालों में होने वाले गैर-जरूरी ऑपरेशनों को फिलहाल टाल दिया गया है.
मौतों का बढ़ता आंकड़ा और लापरवाही:
इस भीषण और अप्रत्याशित गर्मी से बचने के चक्कर में लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं. फ्रांस में नदियों, झीलों और तालाबों में नहाने के दौरान डूबने से कम से कम 48 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा, बंद कारों के भीतर अत्यधिक गर्मी (हीटस्ट्रोक) के कारण तीन मासूम बच्चों की मौत की दर्दनाक घटना भी सामने आई है.
जर्मनी में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां जर्मन लाइफ सेविंग एसोसिएशन के मुताबिक तैराकी से जुड़े हादसों में 20 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इटली में भी बुधवार को गर्मी के कारण 5 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है.
युवाओं और कामकाजी वर्ग पर मंडराता खतरा:
साल 2003 की भीषण हीटवेव के बाद, जिसमें 15,000 से अधिक बुजुर्गों की मौत हुई थी, फ्रांस ने वृद्धों की सुरक्षा के लिए कई नियम बनाए थे. लेकिन इस बार प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता सक्रिय और कामकाजी युवा बने हुए हैं. पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने विशेष रूप से 50 से 70 वर्ष की आयु के स्वस्थ लोगों को सचेत किया है, जो इस मौसम को सामान्य समझकर अपनी बाहरी गतिविधियां और काम जारी रख रहे हैं.
इटली में ट्रेड यूनियनों और ग्रीनपीस के एक अनुमान के अनुसार, इस हीटवेव से देश के करीब 15 लाख निर्माण श्रमिकों, किसानों और कूरियर कर्मचारियों का स्वास्थ्य सीधे तौर पर खतरे में है. इसके बाद कई इतालवी क्षेत्रों में दोपहर के सबसे गर्म समय में आउटडोर काम पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है, और सरकार ने प्रभावित कंपनियों के कर्मचारियों के लिए विशेष फंड की घोषणा की है.
एयर कंडीशनिंग की मांग में भारी उछाल:
यूरोप के घरों में आमतौर पर एयर कंडीशनिंग (AC) का चलन बेहद कम रहा है क्योंकि वहां का मौसम अमूमन ठंडा या सामान्य रहता है. लेकिन इस बार की जानलेवा गर्मी के कारण स्थिति पूरी तरह बदल गई है. फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे देशों में अचानक एसी की मांग में भारी उछाल आया है. सैमसंग, मीडिया और मित्सुबिशी जैसी एशियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के एयर कंडीशनर की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं.
क्या है इस भयानक गर्मी की वजह?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जानलेवा गर्मी के पीछे 'ओमेगा ब्लॉक' (Omega Block) नामक एक विशेष वेदर पैटर्न जिम्मेदार है. यह घटना ग्रीक अक्षर ओमेगा (Omega) के आकार जैसी होती है, जिसमें एक उच्च दबाव वाला क्षेत्र अपने आसपास के हिस्सों में गर्म हवाओं को एक गुब्बारे की तरह कैद कर लेता है. इसके कारण तापमान सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला गया है.
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यूरोप की यह भयानक स्थिति पूरी तरह से जलवायु संकट और जीवाश्म ईंधन के प्रदूषण का नतीजा है. उन्होंने चेतावनी दी कि स्कूल बंद होना, अर्थव्यवस्था का ठप होना और लोगों की मौत होना इस बात का सबूत है कि जलवायु परिवर्तन का विनाशकारी दौर शुरू हो चुका है.
बच्चों की पढ़ाई ठप और पर्यटकों का पलायन:
इस गर्मी का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों और शिक्षकों पर पड़ा है. फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, करीब 13,500 स्कूलों को या तो पूरी तरह बंद कर दिया गया है या उन्हें विशेष समय सारणी पर डाल दिया गया है.
वहीं, ब्रिटेन में भी 1,000 से अधिक स्कूल बंद किए गए हैं क्योंकि कंक्रीट और टिन से बनी कक्षाओं का तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला गया था. इस भीषण गर्मी के कारण यूरोप घूमने आए विदेशी पर्यटक भी बेहाल हैं. पेरिस और अन्य ऐतिहासिक शहरों में आए कई पर्यटक अपनी यात्रा को बीच में ही रद्द कर अपने देश वापस लौट रहे हैं.