ट्रम्प की नीतियों पर रो खन्ना और सर्जियो गोर के बीच तीखी बहस
वाशिंगटन डीसी । डेस्क: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर 'यूएस-इंडिया स्ट्रेटिजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट' में एक बड़ा वैचारिक टकराव देखने को मिला है. एक ही मंच से दो प्रमुख हस्तियों भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बिल्कुल विपरीत तस्वीरें पेश की हैं.
जहां रो खन्ना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीतियों पर तीखा हमला करते हुए संबंधों को ऐतिहासिक रूप से सबसे खराब दौर में बताया, वहीं राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के रिश्तों को पहले से कहीं अधिक मजबूत और आगे बढ़ने वाला करार दिया.
डेमोक्रेटिक नेता रो खन्ना ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियां दोनों देशों के बीच बने-बनाए पुलों को नुकसान पहुंचा रही हैं. उन्होंने कहा, "मैं साफ बात करने में विश्वास रखता हूं. भारत-अमेरिका संबंध पिछले तीस वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं."
खन्ना ने विशेष रूप से ईरान के साथ अमेरिका के तनावपूर्ण रुख को बेहद विनाशकारी बताते हुए कहा कि इसका सीधा और नकारात्मक असर भारत में गैस की कीमतों पर पड़ रहा है. अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने मंच से कहा कि इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के रुख को भी देखा जा सकता है.
दूसरी ओर, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने रो खन्ना के दावों को सिरे से खारिज करते हुए एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखा. गोर ने कहा कि राजनीतिक बयानों और शोर-शराबे से इतर भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध लगातार विकसित हो रहे हैं और भविष्य में भी मजबूत रहेंगे.
उन्होंने भारत के ही एक मंत्री के हवाले से कहा कि दोनों देशों के बीच का यह रिश्ता अगले 50 सालों के बाद भी उतना ही अडिग रहेगा. राजदूत ने दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों की समानता पर जोर देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका, दोनों ही एक मजबूत विपक्ष की अवधारणा में विश्वास रखते हैं, जो कई अन्य देशों में देखने को नहीं मिलता.
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ही मंच से आए ये दोनों बयान असल में भारत-अमेरिका संबंधों के उस विरोधाभास को दर्शाते हैं, जिससे दोनों देश इस वक्त गुजर रहे हैं. एक तरफ जहां राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री और दोस्ती जगजाहिर है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे भारी टैरिफ और आयात प्रतिबंधों ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
इसके अलावा, पिछले एक साल में पाकिस्तान के साथ अमेरिका की नजदीकियों ने भी भारतीय राजनयिकों पर दबाव बनाया है.
इस वैचारिक मतभेद के बीच व्यापारिक मोर्चे से एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई है. राजदूत सर्जियो गोर ने जानकारी दी कि दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित होगा.
उन्होंने बताया कि समझौते का लगभग 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और केवल एक प्रतिशत छोटे मुद्दों पर फैसला होना बाकी है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा.
मंच पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की नजदीकियों का जिक्र करते हुए सर्जियो गोर ने एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया.
उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प ने अचानक प्रधानमंत्री मोदी को फोन मिलाने की इच्छा जताई. जब गोर ने उन्हें याद दिलाया कि भारत में इस वक्त सुबह के 6 बज रहे होंगे, तो ट्रम्प ने तुरंत जवाब दिया, "वह (मोदी) बिल्कुल मेरी तरह हैं, सोते नहीं हैं!"
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जहां एक तरफ यह दोस्ती संबंधों को नई ऊंचाई दे रही है, वहीं व्यापारिक और वैश्विक मोर्चों पर मतभेद आगामी दिनों में दोनों देशों की घरेलू राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं.