हार्ट अटैक का खतरा: महिलाओं की छोटी धमनियां बनीं बड़ी चुनौती
नई दिल्ली । डेस्क: हाल ही में जर्नल 'सर्कुलेशन' में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने हृदय रोग के जोखिमों को लेकर चिकित्सा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के 193 केंद्रों पर किए गए इस व्यापक अध्ययन में 4,267 रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया गया.
इस अध्ययन का सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में धमनियों में वसा (प्लाक) के बहुत निचले स्तर पर भी दिल के दौरे और अन्य गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का अधिक खतरा होता है.
शोध के अनुसार, पुरुषों में हृदय रोग का जोखिम तब बढ़ना शुरू होता है जब उनकी धमनियों में 'टोटल प्लाक बर्डन' यानी वसा का जमाव लगभग 28 प्रतिशत तक पहुँच जाता है. इसके विपरीत, महिलाओं में यह खतरा महज 20 प्रतिशत के स्तर पर ही सक्रिय हो जाता है.
इसका वैज्ञानिक कारण यह बताया गया है कि महिलाओं की कोरोनरी धमनियां आकार में छोटी होती हैं, जिसके कारण वसा की थोड़ी सी मात्रा भी रक्त प्रवाह को गंभीर रूप से बाधित कर सकती है. शोधकर्ताओं ने पाया कि भले ही महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कुल प्लाक की मात्रा कम थी, लेकिन उनका हृदय इस जमाव के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील था.
भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को भारत के संदर्भ में एक 'अलार्म' की तरह बताया है. एम्स (AIIMS) और अन्य प्रमुख संस्थानों के डॉक्टरों का कहना है कि भारतीय महिलाओं में पश्चिमी देशों की तुलना में हृदय रोग बहुत कम उम्र में विकसित हो रहे हैं.
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, पेट का मोटापा और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण स्वास्थ्य के प्रति की जाने वाली लापरवाही इस जोखिम को और बढ़ा देती है.
विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा है कि अब समय आ गया है जब महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य के लिए 'वन साइज फिट्स ऑल' वाले दृष्टिकोण को बदलकर उनके लिए विशेष और जेंडर-स्पेसिफिक उपचार प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं. यह शोध स्पष्ट करता है कि महिलाओं के दिलों को बचाने के लिए शुरुआती पहचान और विशेष चिकित्सा देखभाल की तत्काल आवश्यकता है.