HC ने बंद की धान खरीद घोटाले से जुड़ी जनहित याचिकाएं
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य में 415.7 करोड़ रुपये के कथित धान खरीद घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करने वाली दो जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए मामला बंद कर दिया है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इन याचिकाओं को इस आधार पर निरस्त (निष्प्रभावी) कर दिया कि राज्य सरकार द्वारा नई धान खरीद नीति लागू किए जाने के बाद अब इस याचिका में उठाई गई मांग का कोई औचित्य नहीं रह गया है.
यह जनहित याचिका वर्ष 2022 में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई थी, जब पार्टी राज्य में विपक्ष में थी. याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के धान खरीद सत्रों के दौरान फर्जी स्टॉक समायोजन और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया था.
इसमें 2018-19 में 5.38 करोड़ रुपये (3,067 मीट्रिक टन), 2019-20 में 79.54 करोड़ रुपये (43,656 मीट्रिक टन) और 2020-21 में 330.78 करोड़ रुपये (1,76,416 मीट्रिक टन) के धान की कमी होने का दावा करते हुए स्वतंत्र जांच, नुकसान की वसूली और जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अभिषेक चंद्र गुप्ता ने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार द्वारा नई खरीद नीति लागू कर दिए जाने के कारण अब याचिकाकर्ताओं की शिकायत का समाधान हो चुका है. राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अधिवक्ताओं ने भी इस बात का समर्थन किया.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही याचिकाओं में मांगी गई राहत अब केवल सैद्धांतिक रह गई थी और आगे किसी न्यायिक विचार-विमर्श की आवश्यकता नहीं बची थी. इसके बाद उच्च न्यायालय ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान दायर की गई दोनों जनहित याचिकाओं को समाप्त कर दिया.