अल नीनो का कहर: दुनिया भर में भयंकर गर्मी, सूखे और बाढ़ की चेतावनी
नई दिल्ली । डेस्क: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अल नीनो का प्रकोप अब अपने खतरनाक और चरम रूप में पहुंच चुका है. प्रशांत महासागर के मध्य भाग में सतह का तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस (5.22 डिग्री फ़ारेनहाइट) से अधिक तक बढ़ने का अनुमान है.
तापमान में हुई इस असामान्य बढ़ोतरी के कारण वैश्विक मौसम चक्र के पूरी तरह से बिगड़ने और दुनिया भर में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ने की गंभीर आशंका जताई जा रही है.
मौसम के इस बदलते मिजाज का असर कई महाद्वीपों पर साफ दिखने लगा है. जहां एक तरफ अफ्रीका और यूरोप के कई देश इन दिनों जंगलों में लगी भीषण और बेकाबू आग से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण एशिया में मानसून के मौसम ने भयानक तबाही मचा रखी है.
WMO के अनुसार, भारत समेत पूरे एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिणी यूरोप में आने वाले महीनों में भीषण लू, सूखे और अप्रत्याशित बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा मंडरा रहा है. वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इस साल का अल नीनो इतिहास के सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी अल नीनो का रूप ले सकता है.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि अल नीनो केवल दरवाजे पर दस्तक नहीं दे रहा, बल्कि यह हमारे जीवन के भीतर पहुंचकर गर्मी को बढ़ा रहा है.
उन्होंने चेतावनी दी कि यह तो बस एक शुरुआत है और मानव जनित जलवायु परिवर्तन तथा जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल और गैस) का अनियंत्रित उपयोग इस संकट में 'आग में घी' डालने का काम कर रहा है. उन्होंने वैश्विक नेताओं से तुरंत नए जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट्स को रोकने और जलवायु कार्रवाई में तेजी लाने की अपील की है.
WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो के अनुसार, केवल मौसम का पूर्वानुमान लगाना ही आपदाओं से बचाने के लिए काफी नहीं है. जब तक सरकारें और मानवीय एजेंसियां समय रहते इन पूर्व चेतावनियों के आधार पर धरातल पर ठोस कदम नहीं उठातीं, तब तक कमजोर और संवेदनशील आबादी को सुरक्षित रख पाना असंभव होगा.
आने वाले महीनों में दुनिया भर की सरकारों द्वारा लिए गए निर्णय ही तय करेंगे कि मानवता इस प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा के प्रभाव को झेल पाएगी या नहीं.