पति के पास लौटने को मजबूर नहीं की जा सकती प्रताड़ित पत्नी: HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक पति की याचिका को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला दहेज की मांग, शारीरिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार के आरोपों के कारण अपने पति से अलग रह रही है, तो यह नहीं माना जा सकता कि उसने बिना किसी वाजिब कारण के वैवाहिक जीवन का त्याग किया है.
जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने 18 सितंबर को सुनवाई करते हुए जशपुर फैमिली कोर्ट के 20 नवंबर 2023 के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें पति द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 (दंपति के साथ रहने का अधिकार) के तहत दायर याचिका खारिज कर दी गई थी.
मामले के अनुसार, 26 वर्षीय जशपुर निवासी युवक का विवाह फरवरी 2022 में प्रियंका यादव से हुआ था. अक्टूबर 2022 में महिला अपने मायके चली गई और वापस लौटने से इनकार कर दिया. इसके बाद पति ने पारिवारिक अदालत का रुख किया.
सुनवाई के दौरान पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके साथ मारपीट की जाती थी और दहेज में कार व 5 लाख रुपये नकद की मांग की जा रही थी.
महिला का कहना था कि फरवरी 2022 में हुए हमले के कारण उसका गर्भपात भी हो गया था. इसके अलावा, पति ने उसके सभी जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में रख लिए थे.
महिला ने इसकी शिकायत 'सखी वन स्टॉप सेंटर' में करने के साथ ही घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अलग रह रही है.
अदालत ने माना कि दहेज की मांग, प्रताड़ना, गर्भपात की स्थितियां और महिला के दस्तावेज अपने पास रखना ऐसे ठोस कारण हैं, जो पत्नी के अलग रहने के फैसले का समर्थन करते हैं. इसके साथ ही अदालत ने पति की अपील पूरी तरह खारिज कर दी.