क्या ग्रीनलैंड में बढ़ रहा है चीन का खतरा? ट्रंप के दावे और जमीनी हकीकत
सीजीखबर डेस्क: साल 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि ग्रीनलैंड के आसपास चीनी और रूसी जहाजों की "हर जगह" मौजूदगी है, जिसके चलते सुरक्षा खतरों को देखते हुए इस द्वीप पर नियंत्रण करना आवश्यक हो गया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय डेटा और डेनमार्क के आधिकारिक बयानों के आधार पर विश्लेषण करें तो वास्तविकता इन दावों से कोसों दूर नज़र आती है.
वर्तमान में ग्रीनलैंड के भीतर चीन का कोई आधिकारिक संस्थान, निवेश परियोजना या कोई भी निवासी कंपनी सक्रिय नहीं है. चीन की कुल उपस्थिति केवल 30 चीनी श्रमिकों तक सीमित है जो स्थानीय ग्रीनलैंडिक समुद्री खाद्य कंपनियों में काम कर रहे हैं.
व्यापारिक दृष्टि से भी ग्रीनलैंड का चीन को निर्यात (420 मिलियन डॉलर) उसके आयात (9 मिलियन डॉलर) के मुकाबले कहीं अधिक है, जिसमें मुख्य रूप से आर्कटिक झींगा, हलिबूट और कॉड जैसी मछलियाँ शामिल हैं.
सुरक्षा के मोर्चे पर, डेनमार्क के ज्वाइंट आर्कटिक कमांड के मेजर जनरल सोरेन एंडरसन ने साफ तौर पर कहा है कि ग्रीनलैंड के निकट कोई चीनी या रूसी जहाज नहीं देखे गए हैं, जिसकी पुष्टि 'मरीन-ट्रैफिक' के वेसल-ट्रैकिंग डेटा से भी होती है.
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और रक्षा समिति के अध्यक्ष रास्मस जारलोव ने इन खतरों को पूरी तरह निराधार और "भ्रामक" बताया है.
दिलचस्प तथ्य यह है कि डेनमार्क सरकार ने पहले ही प्रशासनिक उपायों के जरिए चीन को ग्रीनलैंड के हवाई अड्डे के विस्तार और खनन परियोजनाओं से बाहर कर दिया है और एक निवेश स्क्रीनिंग तंत्र भी स्थापित किया है ताकि भविष्य में चीनी निवेश को रोका जा सके.
चीन ने अपनी 'आर्कटिक नीति' के माध्यम से बार-बार स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और 'यूएनसीएलओएस' (UNCLOS) का सम्मान करता है.
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, आर्कटिक को भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का अखाड़ा बनाने के बजाय जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का क्षेत्र होना चाहिए, और अमेरिका को अपने स्वार्थों के लिए दूसरे देशों को मोहरा नहीं बनाना चाहिए.