सरकार की नीतियों से पासपोर्ट रैंकिंग को नुकसान: खड़गे
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और दुनिया भर में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग कमजोर हुई है.
हाल ही में जारी हुई 2026 की ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 197 देशों की सूची में भारत पिछले साल के मुकाबले एक पायदान नीचे खिसककर 125वें स्थान पर आ गया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के 2018 के उस दावे पर सवाल उठाए, जिसमें पीएम ने कहा था कि समय के साथ भारतीय पासपोर्ट की ताकत और इसके प्रति सम्मान बढ़ेगा.
खड़गे ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर वह कथित 'ताकत' आज कहां दिखाई दे रही है, क्योंकि जमीनी हकीकत प्रधानमंत्री के दावों के बिल्कुल उलट है.
उन्होंने अलग-अलग वैश्विक सूचकांकों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) से संदर्भित पासपोर्ट रैंकिंग में भी भारत साल 2023 के 74वें स्थान से गिरकर 2026 में 80वें स्थान पर आ गया है. वहीं, ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस की पासपोर्ट रैंकिंग में भारत 125वें नंबर पर है.
पासपोर्ट रैंकिंग के अलावा खड़गे ने पासपोर्ट सेवाओं की बढ़ती कीमतों और गिरते स्तर को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि सुविधाओं में सुधार करने के बजाय सरकार ने पासपोर्ट बनवाना और महंगा कर दिया है. सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये और तत्काल सेवा के लिए शुल्क 5,000 रुपये तक कर दिया गया है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने देश के पर्यटन क्षेत्र और वीजा सिस्टम पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने भारत के आधिकारिक वीजा पोर्टल को बेहद पुराना और भ्रमित करने वाला बताते हुए कहा कि यह 1990 के दशक की किसी वेबसाइट जैसा दिखता है, जो 'अतिथि देवो भव' की भावना के विपरीत है.
साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी तक कोरोना महामारी से पहले के स्तर पर नहीं पहुंच पाई है.
साल 2019 में जहां 10.93 मिलियन विदेशी पर्यटक भारत आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 9.95 मिलियन रह गई. खड़गे ने आशंका जताई कि सरकार इस नाकामी को छिपाने के लिए विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों में एनआरआई की संख्या को भी शामिल कर रही है.