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नए आयकर कानून में क्या है खास

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25 अग. 2025, 12:32 AM 4 मिनट में पढ़ें 6

आयकर
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नई दिल्ली । डेस्क: आयकर रिटर्न दाखिल करना लंबे समय से सालाना परेशानी माना जाता रहा है. जटिल भाषा, बिखरी हुई धाराएं और ढेर सारे कागजातों के कारण कई वेतनभोगी कर्मचारी और छोटे करदाता डरते थे. लेकिन 2025 का नया आयकर विधेयक इस तस्वीर को बदल देगा, जिससे कर दाखिल करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, स्पष्ट और समय बचाने वाला बनाया जाएगा.


वेतन से संबंधित धाराओं का पुनर्गठन

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सबसे बड़ा सुधार वेतन से संबंधित धाराओं को एकत्र करना है. पहले भत्तों, छूट या रिटायरमेंट लाभों को खोजने के लिए करदाताओं को कई धाराओं को खंगालना पड़ता था. अब इन्हें एक ही अध्याय में सरल भाषा और तालिका के रूप में व्यवस्थित किया गया है. आयकर कानून को सरल बनाने का लक्ष्य पारदर्शिता बढ़ाना और करदाताओं को स्वयं रिटर्न समझने व दाखिल करने की क्षमता प्रदान करना है. कानून की लंबाई भी कम की गई है-‘वेतन’ अध्याय के शब्दों की संख्या 4,401 से घटाकर 3,420 कर दी गई है. भाषा को सरल किया गया है, जैसे कि perquisite, profit in lieu of salary, standard deduction जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा दी गई है, जिसमें कानूनी और तकनीकी जटिलताएं लगभग खत्म कर दी गई हैं.


छोटे करदाताओं के लिए राहत


पहले छोटे करदाताओं को अपनी आय के प्रत्येक स्रोत या छूट को साबित करने के लिए कई दस्तावेज जमा करने पड़ते थे. नए नियमों में स्पष्ट परिभाषा और मानकीकरण के माध्यम से यह झंझट कम हो गया है. अब अतिरिक्त कागजातों की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे विवाद कम होंगे और निश्चितता बढ़ेगी.


प्री-फिल्ड जानकारी


नियोक्ताओं और बैंकों से पहले से ही प्री-फिल्ड जानकारी उपलब्ध होगी. इससे कई दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होगी, गलतियां कम होंगी, और कर्मचारी तेजी से और सटीक रूप से रिटर्न दाखिल कर सकेंगे.


कर नियोजन में पारदर्शिता


कर नियोजन हमेशा जटिल रहा है, क्योंकि छूट या छूट से संबंधित धाराएं विभिन्न जगहों पर बिखरी हुई थीं. नए कानून में धारा 10 के तहत छूट को 6 सूचियों में तालिका के रूप में व्यवस्थित किया गया है. धारा 80C जैसे जटिल प्रावधानों को अलग सूची में ले जाया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़े. कौन सी धारा के तहत कौन सी छूट और इसकी सीमा क्या है-जैसे कि 80C, 80D, मकान किराया भत्ता-सब कुछ स्पष्ट रूप से लिखा गया है. इससे कर्मचारी बिना भटके कर नियोजन कर सकेंगे.


नए करदाताओं के लिए सरल भाषा


कर प्रणाली नए लोगों के लिए डरावनी हो सकती है. इसलिए previous year और assessment year जैसे शब्दों को हटाकर अब सीधे tax year शब्द का उपयोग किया जा रहा है. सभी परिभाषाएं एक ही जगह पर रखी गई हैं. इस विधेयक में Taxpayer’s Charter जोड़ा गया है, जिसमें करदाता के अधिकार और कर्तव्यों का उल्लेख है. इससे नए करदाता अधिक आत्मविश्वास महसूस करेंगे. सरल फॉर्म, चरण-दर-चरण निर्देश और प्री-फिल्ड जानकारी नए लोगों के लिए दाखिल प्रक्रिया को आसान बनाएगी.


विश्वास और पारदर्शिता की दिशा में कदम


यहां केवल समय बचाने की बात नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक लोगों को कर दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है. शून्य-कर सीमा को अब कुछ शर्तों के साथ 12 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है, रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, और अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने के लिए 48 महीने का समय दिया गया है. सरल भाषा के उपयोग से जटिलता कम होगी. इससे सिस्टम की निष्पक्षता में विश्वास बढ़ेगा, और अनिच्छुक करदाता भी कर दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे. अधिक टीडीएस-टीसीएस और बड़े नकद लेनदेन पर निगरानी जैसे कदम लंबे समय में सही प्रथाओं को सुनिश्चित करेंगे.


पेशेवरों पर निर्भरता कम होगी


ज्यादातर जानकारी प्री-फिल्ड होने और फॉर्म के सरल होने से करदाताओं को अब पेशेवरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे समय और खर्च दोनों बचेंगे. करदाता स्वयं सटीक रूप से रिटर्न दाखिल कर सकेंगे, जिससे सुविधा और दक्षता दोनों बढ़ेगी.


2025 का आयकर विधेयक कर दाखिल करने को कम डरावना बना रहा है. जटिल भाषा को हटाकर, कागजातों को कम करके, और जानकारी को सरल व व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने से-चाहे नए हों या अनुभवी-सभी करदाता आत्मविश्वास के साथ रिटर्न दाखिल कर सकेंगे. 


विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल फॉर्म को सरल करना नहीं है, बल्कि सिस्टम में विश्वास और निष्पक्षता बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा कदम है. यह भविष्य में और अधिक लोगों को कर नेटवर्क में शामिल करने में मदद करेगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP