सरेंडर करने वाले पूर्व माओवादियों ने बदली अपनी किस्मत
रायपुर । संवाददाता: गढ़चिरौली और बस्तर के घने जंगलों में वर्षों तक हथियारों के साए में जीवन बिताने वाले पूर्व माओवादियों ने अब कलम थामकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की है. पिछले वर्ष अक्टूबर में सरेंडर करने वाले 210 माओवादियों के समूह में से सात ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं (SSC) की परीक्षा दी थी.
हाल ही में घोषित परिणामों में इनमें से तीन गीता नरोटे (35), अर्जुन ओयाम (32) और संतोष अचला (31) ने प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) हासिल कर मिसाल कायम की है.
बचपन में परिस्थितिवश पढ़ाई छोड़ने वाली गीता नरोटे कभी माओवादी संगठन की डिविजनल कमेटी मेंबर हुआ करती थीं. अब वह नर्स बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं.
वहीं, कभी माओवादियों के राजनीतिक स्कूल में पढ़ाने वाले अर्जुन ओयाम और संतोष अचला भी इस सफलता से बेहद उत्साहित हैं. अर्जुन अब अपने गांव लौटकर शिक्षक बनना चाहते हैं, जबकि संतोष उच्च शिक्षा हासिल कर अपना व्यवसाय और खेती संभालना चाहते हैं.
पुनर्वास राशि से किताबें खरीदकर और दिन में व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ रातों में खुद पढ़ाई करके इन पूर्व माओवादियों ने यह उपलब्धि हासिल की है. जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के सहयोग से मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का कहना है कि सरेंडर के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है और अब वे शांति व शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं.