पाक पर FATF की तलवार, ग्रे लिस्ट का खतरा
नई दिल्ली । डेस्क: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कटघरे में ला खड़ा किया है.
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF), जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ वैश्विक स्तर पर काम करती है, ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. साथ ही, FATF ने आतंकी वित्तपोषण को रोकने के लिये देशों द्वारा उठाये गए कदमों पर अपनी नजरें तेज कर दी है.
इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में दोबारा शामिल किये जाने की संभावना को और मजबूत कर दिया है.
FATF की निंदा और राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर फोकस
FATF ने अपने बयान में कहा कि पहलगाम हमला आतंकवादी समर्थकों के बीच धन के लेन-देन के बिना संभव नहीं हो सकता था. यह पहली बार है जब FATF ने अपनी विश्लेषण प्रक्रिया में 'राज्य प्रायोजित आतंकवाद' (State-Sponsored Terrorism) के कॉन्सेप्ट को शामिल किया है और इसे आतंकी वित्तपोषण के स्रोत के रूप में चिह्नित किया है. यह कदम पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसके खिलाफ चिंतायें और गहरी हो रही हैं.
पिछले एक दशक में FATF ने किसी आतंकी हमले की निंदा केवल तीसरी बार की है. इससे पहले 2015 और 2019 में संगठन ने बड़े आतंकी हमलों की निंदा की थी. FATF के इस रुख से साफ है कि वह आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण को लेकर गंभीर है और पाकिस्तान जैसे देशों की जवाबदेही तय करने के लिये तैयार है.
टेरर फाइनेंसिंग पर FATF की नई रणनीति
FATF जल्द ही आतंकी वित्तपोषण पर एक विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट जारी करने की तैयारी में है. इसके लिए संगठन ने 'टेरर फाइनेंसिंग रिस्क एंड कॉन्टेक्स्ट किट' तैयार की है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान जैसे देश अपनी सीमा से संचालित आतंकी गतिविधियों के बारे में गलत जानकारी न दे सकें. इसके अलावा, FATF अगले एक महीने में आतंकी वित्तपोषण के जोखिमों पर एक और विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा.
एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने बताया, "FATF का यह कदम ऐतिहासिक है. पहली बार संगठन ने राज्य प्रायोजित आतंकवाद को आतंकी वित्तपोषण के स्रोत के रूप में मान्यता दी है. भारत का राष्ट्रीय जोखिम आकलन (National Risk Assessment) पहले से ही पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को एक बड़ा खतरा मानता है. अब FATF की रिपोर्ट में इस मुद्दे का शामिल होना दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की हरकतों को लेकर चिंता बढ़ रही है."
अगस्त में होगी अहम बैठक
FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप की अगस्त 2025 में होने वाली बैठक में पाकिस्तान की गतिविधियों का पूरा ब्योरा पेश किया जाएगा. इस बैठक में भारत और अन्य सदस्य देश पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल करने के लिये जोरदार पैरवी करेंगे.
यह बैठक पाकिस्तान के लिए निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि FATF के सख्त रुख से उसकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है.
पाकिस्तान का पुराना रिकॉर्ड
पाकिस्तान को 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था. हालांकि, 2022 में उसे इस लिस्ट से बाहर निकाला गया, जब उसने आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ कानून बनाने और FATF की शर्तों का पालन करने का वादा किया था.
लेकिन, पाकिस्तान ने अपने वादे पूरे नहीं किये और आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ कोई ठोस कानून नहीं बनाया. अब पहलगाम हमले ने एक बार फिर उसके खराब रिकॉर्ड को उजागर कर दिया है.
FATF की ग्रे लिस्ट क्या है?
FATF की ग्रे लिस्ट उन देशों की सूची है, जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने में कमियां पाई जाती हैं. इस सूची में शामिल देशों को FATF की निगरानी में रखा जाता है और उन्हें अपनी वित्तीय प्रणाली को सुधारने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना पूरी करनी होती है.
ग्रे लिस्ट में शामिल होने से किसी देश की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय साख को नुकसान पहुंचता है, जिससे विदेशी निवेश, ऋण, और व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
पहलगाम हमले का जिक्र
FATF ने अपने बयान में पहलगाम हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया है, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी. संगठन ने कहा, "22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुआ बर्बर आतंकी हमला और हाल के अन्य हमले आतंकवादी समर्थकों के बीच धन की आवाजाही के बिना संभव नहीं थे."
यह बयान दर्शाता है कि FATF आतंकी वित्तपोषण के स्रोतों को ट्रैक करने और दोषी देशों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये प्रतिबद्ध है.
वैश्विक समुदाय का समर्थन
FATF अपने वैश्विक नेटवर्क में शामिल 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों को आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ उनके प्रयासों को मजबूत करने में सहयोग कर रहा है.
संगठन का यह कदम न केवल पाकिस्तान के लिये, बल्कि उन सभी देशों के लिये एक चेतावनी है जो आतंकी गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देते हैं.
भारत की भूमिका
भारत शुरू से ही FATF में पाकिस्तान की गतिविधियों को उजागर करता रहा है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज और बुलंद की है.
FATF की मौजूदा रणनीति में भारत के राष्ट्रीय जोखिम आकलन का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है. अगस्त में होने वाली बैठक में भारत पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत सबूत पेश करने की तैयारी में है, ताकि उसे ग्रे लिस्ट में डाला जा सके.
पहलगाम आतंकी हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद और उसका वित्तपोषण वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा है. FATF का सख्त रुख और राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर उसका नया फोकस पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है.
अगर अगस्त में होने वाली बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया, तो उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है. यह घटनाक,क्रम वैश्विक समुदाय के लिये भी एक संदेश है कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कड़े कदम उठाने की जरूरत है.