पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष में तब्दील होता दिख रहा है. शुक्रवार तड़के पाकिस्तान की वायुसेना ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत कई प्रमुख प्रांतों पर भीषण हवाई हमले किए. यह कार्रवाई अफगानिस्तान द्वारा गुरुवार रात पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर किए गए बड़े हमले के जवाब में की गई है.
इस ताज़ा सैन्य टकराव ने कतर की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया है और क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है.
तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार, शुक्रवार सुबह काबुल में कम से कम तीन ज़ोरदार धमाके सुने गए. इसके अलावा दक्षिण में कंधार और दक्षिण-पूर्वी प्रांत पक्तिया में भी पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने बमबारी की है.
अफगानिस्तान का कहना है कि यह हमला पूरी तरह से 'एकतरफा और आक्रामक' है, जबकि पाकिस्तान का तर्क है कि वह अपनी सीमाओं के भीतर छिपे आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है.
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि गुरुवार रात शुरू हुए उनके जवाबी हमले में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं. तालिबान का दावा है कि उन्होंने 19 पाकिस्तानी सैन्य चौकियों और दो बेस को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, और कुछ पाकिस्तानी सैनिकों को जीवित पकड़ लिया गया है.
दूसरी ओर, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि उनके केवल दो सैनिक शहीद हुए हैं और तीन घायल हैं, जबकि जवाबी कार्रवाई में 36 अफगान लड़ाके मारे गए हैं.
इस युद्ध जैसी स्थिति का सबसे बुरा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है. तोरखम सीमा के पास स्थित एक अफगान शरणार्थी शिविर पर मिसाइल गिरने से महिलाओं और बच्चों सहित 13 नागरिक घायल हो गए हैं.
अफगान अधिकारियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू कर दिया है. वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी मोर्टार हमलों के डर से स्थानीय निवासी गांवों को छोड़कर भाग रहे हैं.
दोनों देशों के बीच 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा, जिसे 'ड्यूरंड लाइन' कहा जाता है, लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है. अफगानिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय सीमा को मान्यता नहीं देता, जिससे अक्सर सीमा पार से गोलाबारी होती रहती है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव दोनों पक्षों से संयम बरतने और मतभेदों को कूटनीति के जरिए सुलझाने का आग्रह करते हैं.
इस संघर्ष के पीछे का मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूहों को पनाह देने का आरोप है. हालांकि, काबुल इन आरोपों को हमेशा से नकारता रहा है. मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह छिटपुट हिंसा एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है.