NCERT किताबों से 'महान' शब्द हटाने पर तीखी जंग
नई दिल्ली । डेस्क: एनसीईआरटी (NCERT) की नई किताबों से मुगल बादशाह अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम से 'महान' शब्द हटाए जाने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी/आरएसएस के बीच रविवार को भी जोरदार राजनीतिक घमासान जारी रहा.
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार इतिहास को अपनी राजनीति के हिसाब से 'संकीर्ण' बना रही है, खासकर मुगल काल के शासकों के प्रति राजनीतिक नापसंदगी के चलते ये बदलाव किए गए हैं.
इसके विपरीत, बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इन बदलावों को 'लंबे समय से अपेक्षित सुधार' का हिस्सा बताया है.
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि अकबर और टीपू सुल्तान ने "देश पर 700 साल तक शासन किया." उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 27 प्रतिशत था और देश को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था.
कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने भी संशोधन की आलोचना करते हुए कहा, "अकबर सांप्रदायिक सद्भाव के राजा थे. उन्होंने हिंदू धर्म को भी स्वीकार किया." उन्होंने आगे कहा कि टीपू सुल्तान ने "अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी" और दोनों ही महान प्रशासक थे.
उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी को मौका मिला तो वह "बहुत कुछ हटा देगी" और 2029 के राष्ट्रीय चुनाव को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया.
दूसरी ओर, आरएसएस ने इन बदलावों का बचाव किया है. आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने नागपुर में कहा कि इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में "कई सकारात्मक बदलाव" हुए हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि 'अकबर द ग्रेट' और 'टीपू सुल्तान द ग्रेट' को हटा दिया गया है, लेकिन जोर देकर कहा कि छात्रों को उनके "क्रूर कर्मों" के बारे में भी जानना चाहिए.
एनसीईआरटी ने हालांकि, COVID-19 के बाद किए गए बदलावों को "छात्रों का तनाव कम करने" और "असंगत सामग्री" हटाने से जोड़ा है. लेकिन, किताबों से 2002 के गुजरात दंगे, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस, गांधी की हत्या से जुड़े अंश और डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत जैसे संवेदनशील विषयों को हटाए जाने पर विद्वानों और विपक्ष ने लगातार सवाल उठाए हैं.