अब महिला कैदी वीडियो कॉलिंग के जरिए कर सकेंगी परिवार से बात
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित केंद्रीय कारागार से महिला बंदियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. जेल प्रशासन ने महिला कैदियों को मानसिक संबल देने और उनके परिजनों की सहूलियत के लिए एक खास वीडियो कॉलिंग सुविधा की शुरुआत की है.
मदर्स डे के खास मौके पर शुरू की गई इस सेवा के तहत अब महिला कैदी हफ्ते में एक बार अपने परिवार के सदस्यों से चेहरा देखकर बात कर सकेंगी. जेल में बंद लगभग 200 महिला कैदियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई इस योजना के लिए प्रशासन ने सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के साथ एक करार किया है.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाली अनहोनी को लेकर परिजन अक्सर चिंता जाहिर करते रहे हैं.
इस पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का सहारा लिया गया है. इसके तहत प्रत्येक महिला बंदी को एक विशिष्ट बायोमेट्रिक कार्ड जारी किया जाएगा. कैदी अपने कार्ड में मौजूद बैलेंस के आधार पर ही वीडियो कॉल कर सकेंगी. कॉलिंग की प्रक्रिया बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट या स्क्रीन मैच) के बाद ही शुरू होगी और कॉल कनेक्ट होते ही स्क्रीन पर संबंधित कैदी का नाम दिखाई देगा.
इस सुविधा के तहत एक बार में अधिकतम 5 मिनट तक बात करने की अनुमति होगी, जिसके लिए 5 रुपये प्रति मिनट की दर से मामूली शुल्क तय किया गया है. निर्धारित समय सीमा समाप्त होते ही कॉल अपने आप कट जाएगी.
रायपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री के मुताबिक, इस तकनीक से दूर-दराज के इलाकों से आने वाले परिजनों को काफी राहत मिलेगी और जेल परिसर में रोज होने वाली आगंतुकों की भारी भीड़ को कम करने में भी मदद मिलेगी.
रायपुर में इस सुविधा की सफलता को देखते हुए आने वाले समय में इसे राज्य के अन्य संभागों जैसे दुर्ग, बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर की जेलों में भी लागू करने की योजना है. वर्तमान में छत्तीसगढ़ की 33 जेलों में सामान्य वॉयस-कॉलिंग की सुविधा पहले से ही काम कर रही है.
जेल प्रशासन के इस मानवीय फैसले की कानूनी हलकों में भी सराहना हो रही है. रायपुर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हितेंद्र तिवारी ने इसे एक सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि पहले जहां फोन पर केवल एक व्यक्ति बात कर पाता था, वहीं अब पूरा परिवार एक साथ जुड़ सकेगा.
इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि कैदियों को उनके कानूनी सलाहकारों (वकीलों) से बातचीत करने के लिए भी इसी तरह की वीडियो कॉलिंग की सुविधा मिलनी चाहिए. वहीं, अधिवक्ता इंद्राणी चौधरी का मानना है कि इस पहल से महिला बंदियों को गहरा मानसिक सहयोग मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही कैदियों की उनके वकीलों से व्यक्तिगत मुलाकात की प्रक्रिया को भी फिर से सुचारू रूप से शुरू किया जाना चाहिए ताकि मुकदमों की पैरवी में कोई बाधा न आए.