विशेषज्ञों की चेतावनी: ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले 'युद्ध अपराध'
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए सैन्य अभियान पर अब अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने मोर्चा खोल दिया है. 100 से अधिक प्रमुख विशेषज्ञों ने एक साझा पत्र जारी कर इस सैन्य कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन और संभावित रूप से 'युद्ध अपराध' करार दिया है.
गुरुवार को प्रकाशित इस पत्र में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ यह अभियान न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि इसने वैश्विक सुरक्षा ढांचे को भी खतरे में डाल दिया है.
कानून विशेषज्ञों, जिनमें येल लॉ स्कूल की ऊना हैथवे और मानवाधिकार कार्यकर्ता केनेथ रोथ जैसे नाम शामिल हैं, ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना किसी भी संप्रभु देश पर हमला अवैध है.
विशेषज्ञों का कहना है कि न तो ईरान ने अमेरिका या इजरायल पर कोई हमला किया था और न ही किसी आसन्न खतरे का कोई विश्वसनीय प्रमाण मौजूद था.
पत्र में युद्ध के पहले ही दिन ईरान के मिनाब में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसमें 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश बच्चे थे. इसके अलावा, अस्पतालों, जल संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की भी कड़ी निंदा की गई है.
विशेषज्ञों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बयानों को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति 'खतरनाक अनादर' बताया है.
पत्र में राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अमेरिका ईरान पर 'सिर्फ मनोरंजन' के लिए हमले कर सकता है.
साथ ही, पीट हेगसेथ के उस बयान की भी आलोचना की गई जिसमें उन्होंने युद्ध के 'नियमों' को दरकिनार करने की बात कही थी.
विशेषज्ञों का तर्क है कि 'ग्लव्स ऑफ' (कठोर) दृष्टिकोण अपनाकर नागरिक सुरक्षा ढांचे को नष्ट किया जा रहा है. विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि यह युद्ध अमेरिकी करदाताओं को प्रतिदिन लगभग 2 अरब डॉलर का भारी नुकसान पहुंचा रहा है. विशेषज्ञों ने वाशिंगटन से तुरंत अपना रास्ता बदलने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने का आग्रह किया है.