यूरोप में भीषण गर्मी: 8 लोगों की मौत, परमाणु संयंत्र बंद
नई दिल्ली । डेस्क: यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसके कारण हालात बेहद गंभीर हो गये हैं. तापमान इतना बढ़ गया है कि कई जगहों पर जंगल में आग लग रही है, तो कहीं परमाणु बिजली संयंत्रों को बंद करना पड़ रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति ग्लोबल वॉर्मिंग का परिणाम है और आने वाले वर्षों में यह और खराब हो सकती है.
उत्तरी गोलार्ध में जुलाई साल का सबसे गर्म महीना होता है. यूरोप में गर्मी का मौसम अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन तापमान पहले ही असहनीय स्तर पर पहुंच चुका है. इस गर्मी के कारण अब तक यूरोप में 8 लोगों की मौत हो चुकी है. पिछले एक हफ्ते से हालात इतने खराब हैं कि कुछ देशों में परमाणु बिजली संयंत्रों को बंद करना पड़ा है.
स्पेन में मामूली राहत, लेकिन पूर्वी और मध्य यूरोप में कोई सुधार नहीं
गुरुवार को स्पेन में स्थिति में थोड़ा सुधार देखा गया, लेकिन पूर्वी और मध्य यूरोप में हालात जस के तस हैं. ग्रीस में अत्यधिक तापमान और शुष्क मौसम के कारण कई जगहों पर जंगल में आग लग गई है. स्पेन के कैटालोनिया और तुर्की में भी जंगल की आग की खबरें हैं. स्पेन के सविल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो दिल्ली और कोलकाता के तापमान को भी मात दे रहा है. पिछले शनिवार को एल ग्रानाडो में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जून के महीने में स्पेन का अब तक का सबसे गर्म दिन था.
फ्रांस, जर्मनी और इटली में भी गर्मी का कहर
फ्रांस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है. गर्मी के कारण सैकड़ों लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुये हैं. गर्मी के बीच पर्यटकों को एफिल टॉवर पर चढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है. जर्मनी और इटली भी गर्मी की चपेट में हैं. इटली के नेपल्स और पालेर्मो में तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. रोम और मिलान सहित इटली के 18 शहरों में गुरुवार से रेड अलर्ट जारी किया गया है. ऑस्ट्रिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, सर्बिया और स्लोवेनिया जैसे देशों में भी भीषण गर्मी के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है.
गर्मी से 8 लोगों की मौत, परमाणु संयंत्र बंद
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार तक यूरोप में गर्मी के कारण 8 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें स्पेन में 4, फ्रांस में 2 और इटली में 2 लोगों की जानें गई है. इसके अलावा, गर्मी के कारण दक्षिण फ्रांस में गारोन नदी का जल तापमान इतना बढ़ गया कि गोल्फेक परमाणु बिजली संयंत्र के दो रिएक्टरों में से एक को बंद करना पड़ा. स्विट्जरलैंड के बेजनाओ परमाणु संयंत्र में भी दो रिएक्टर बंद किये गये हैं, क्योंकि आर नदी का जल तापमान बहुत अधिक हो गया है. इन संयंत्रों में रिएक्टरों को ठंडा करने के लिये नदी के पानी का उपयोग किया जाता है, लेकिन उपयोग के बाद यह पानी गर्म होकर वापस जाता है. अगर नदी का पानी 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म हो जाये, तो यह उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं रहता, क्योंकि इससे जलजीवों के लिये खतरा पैदा हो सकता है.
वैश्विक तापमान में वृद्धि है जिम्मेदार
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भीषण गर्मी वैश्विक तापमान वृद्धि का परिणाम है. उनका अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में स्थिति और बदतर हो सकती है. इस गर्मी ने न केवल लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, बल्कि यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति और पर्यावरण पर भी गहरा असर डाला है.