इथियोपिया के ज्वालामुखी की राख से भारतीय उड़ानें प्रभावित
नई दिल्ली । डेस्क: इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी से निकली राख के भारतीय हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ने के कारण, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी एयरलाइनों के लिए एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है. जानकारी के अनुसार, ज्वालामुखी की राख के बादल दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच गए हैं.
DGCA ने एयरलाइन ऑपरेटरों को सलाह दी है कि वे सभी प्रभावित क्षेत्रों और ऊँचाई (Altitudes) से बचें. DGCA ने बताया कि टूलूज़ ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा पहले ही 'ज्वालामुखी राख एडवाइजरी' और 'ASHTAM' जारी किए जा चुके हैं.
विमानन नियामक ने एयरलाइनों को परिचालन पुस्तिकाओं के अनुसार, ज्वालामुखी राख प्रक्रियाओं पर कॉकपिट और केबिन क्रू को जानकारी देने, नवीनतम एडवाइजरी के आधार पर योजना और रूट में बदलाव करने और किसी भी संभावित राख का सामना होने पर तुरंत रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है. एयरलाइनों को क्षेत्र की 'कंटामिनेशन' साफ होने तक परिचालन स्थगित करने की भी सलाह दी गई है.
DGCA की एडवाइजरी के मद्देनजर, अकासा एयर, इंडिगो और KLM सहित कई एयरलाइनों ने प्रभावित गलियारे से गुजरने वाली कुछ उड़ानें रद्द कर दी हैं. राख के बादल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंचने की खबरों के बीच, एयर इंडिया की उड़ान AI 358 (दिल्ली-टोक्यो) को टेकऑफ से ठीक पहले रोक दिया गया.
KLM रॉयल डच एयरलाइंस ने एम्स्टर्डम-दिल्ली सेवा (KL 871) और वापसी की दिल्ली-एम्स्टर्डम उड़ान (KL 872) को रद्द कर दिया. स्पाइसजेट ने दुबई (DXB) आने-जाने वाले यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है, क्योंकि अरब प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में ज्वालामुखी राख की गतिविधि दर्ज की गई है.
एयर इंडिया ने कहा कि वे स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं. अकासा एयर ने भी कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय विमानन एडवाइजरी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्थिति का आकलन कर रहे हैं.
छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा मुंबई ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइन से अपनी उड़ानों की स्थिति जांच लें.
यह घटनाक्रम इथियोपिया में हेली गुब्बी ज्वालामुखी के लगभग 10,000 वर्षों में पहली बार फटने के बाद सामने आया है, जिससे निकला भारी राख का गुबार लाल सागर को पार कर ओमान और यमन होते हुए भारत तक पहुंचा है.