रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

बुजुर्ग बिगड़ैल संतान को बिना सबूत घर से निकाल सकते हैं: दिल्ली HC

C

CG Khabar

03 दिस. 2025, 04:53 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

बुजुर्ग
बुजुर्ग

नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बुजुर्ग माता-पिता अपनी संतान के दुर्व्यवहार या अपमानजनक व्यवहार के मामले में उन्हें बिना किसी सबूत के घर से निकाल सकते हैं. यह फैसला 2007 के 'अभिभावकों के भरण-पोषण एवं वृद्धजनों का कल्याण अधिनियम' के तहत दिया गया है, जो वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करता है. 


कोर्ट ने साफ कर दिया कि संतान के पास माता-पिता के घर में रहने का कोई स्थायी अधिकार नहीं है.

विज्ञापन


यह फैसला दिल्ली के राजा गार्डन निवासी प्यारे के मामले में आया है. 2014 में प्यारे ने अपनी बेटी, दामाद और नाती-पोतों को अपनी नई राजिंदर नगर स्थित घर की तीसरी मंजिल पर रहने दिया था. लेकिन धीरे-धीरे बेटी ने प्यारे और उनकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया. 


इसके बाद प्यारे ने 2022 में 2007 के अधिनियम के तहत स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई. जिला मजिस्ट्रेट ने बेटी को पिता के घर छोड़कर जाने का आदेश दिया.


मामले की सुनवाई के दौरान प्यारे ने अपनी बेटी को 'परित्यक्ता' घोषित कर दिया. बेटी ने जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ विभिन्न अदालतों में अपील की, जो अंततः दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई. 


हाईकोर्ट ने बेटी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि संतान बुजुर्गों के साथ बुरा व्यवहार करती है, तो माता-पिता उन्हें घर से बेदखल कर सकते हैं. कोर्ट ने दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर को इस आदेश के कार्यान्वयन की निगरानी करने का निर्देश भी दिया.


एक वकील ने बताया कि यह फैसला बुजुर्गों के हित में एक बड़ा कदम है. 2007 का अधिनियम वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर में सम्मान के साथ रहने की गारंटी देता है, और यह फैसला स्पष्ट करता है कि संतान का घर में रहना चिरस्थायी हक नहीं हो सकता. इस फैसले से बुजुर्गों को दुर्व्यवहार से बचाने में मदद मिलेगी, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां पारिवारिक विवाद आम हैं. कोर्ट ने जोर दिया कि परिवार का मतलब सम्मान और देखभाल है, न कि उत्पीड़न.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP