खाद्य तेल: अब केवल 9 तय पैकेट साइज में ही होगी बिक्री
नई दिल्ली । डेस्क: देश में खाद्य तेलों की कीमतों में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों के तहत खाद्य तेलों और वसा (fats) के लिए मानक पैकेट साइज (Standard Pack Sizes) को अनिवार्य कर दिया है. सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बाजार में विभिन्न ब्रांडों के बीच कीमतों की तुलना को आसान बनाना और उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाकर सही विकल्प चुनने में मदद करना है.
संशोधित नियमों के अनुसार, अब बाजार में मिलने वाले प्रमुख खाद्य तेल जैसे पाम ऑयल, सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, बिनौला (कॉटनसीड), मक्का का तेल और ब्लेंडेड ऑयल-केवल 9 तय पैकेट आकारों में ही बेचे जा सकेंगे. ये मानक साइज 200 मिलीलीटर/ग्राम से लेकर 20 लीटर/किलोग्राम के बीच निर्धारित किए गए हैं.
सरकार ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए खाद्य तेल निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को तीन महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया है ताकि वे नए नियमों के अनुरूप खुद को ढाल सकें.
हालांकि, जो कंपनियां इस समयसीमा से पहले नए मानकों को अपनाना चाहती हैं, उन्हें तुरंत ऐसा करने की अनुमति दी गई है. यह नियम घरेलू स्तर पर बनने वाले और आयात किए जाने वाले, दोनों तरह के खाद्य तेलों पर समान रूप से लागू होगा.
नए नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि खाद्य तेल का पैकेट वॉल्यूम यानी लीटर या मिलीलीटर में है, तो उस पर लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 के अनुसार उसका वजन (किलोग्राम या ग्राम) भी स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य होगा.
उपभोक्ताओं के लिए छोटे और किफायती पैकेट्स की उपलब्धता बनी रहे, इसलिए सरकार ने 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम के पैकेटों और कुछ छोटे खाद्य तेलों को इस दायरे से बाहर रखा है.
यह फैसला देश के खाद्य तेल क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संघों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है.
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे खुदरा बाजार में विसंगतियां दूर होंगी और सभी कंपनियों के लिए समान अवसर उपलब्ध होंगे. उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में गैर-मानक पैकेटों की बाढ़ आ गई थी, जिससे बाजार में काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी और यह नया नियम इस अव्यवस्था को ठीक करेगा.