कांगो-युगांडा में इबोला का कहर: 600 संदिग्ध मरीज, 139 की मौत; WHO का हाई अलर्ट
जिनेवा । डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के संदिग्ध मामलों की संख्या तेजी से बढ़कर 600 हो गई है, जबकि इस घातक बीमारी से अब तक 139 लोगों की मौत की आशंका है.
जिनेवा में आयोजित आपातकालीन समिति की बैठक के बाद WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयिसस ने पुष्टि की है कि यह प्रकोप राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर बेहद 'उच्च जोखिम' पर है और यह अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बना हुआ है, हालांकि वैश्विक स्तर पर इसका खतरा फिलहाल कम है.
यह नया प्रकोप कांगो द्वारा अपनी पिछली महामारी की समाप्ति की घोषणा के महज पांच महीने बाद ही सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का संक्रमण 'बुंडिबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जिसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके लिए वर्तमान में कोई टीका या सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है.
WHO के आपातकालीन प्रमुख चिखवे इहेकवेज़ु ने कहा कि संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता संक्रमण की कड़ियों (chains of transmission) की पहचान करना है ताकि महामारी के वास्तविक पैमाने को समझकर उचित स्वास्थ्य देखभाल प्रदान की जा सके.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 600 संदिग्ध मामलों में से 51 मामलों की पुष्टि कांगो के उत्तरी प्रांतों इतूरी और उत्तरी कीवू में हो चुकी है. वहीं, युगांडा की राजधानी कंपाला में भी दो पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें से एक संक्रमित व्यक्ति की मौत हो चुकी है.
यह दोनों मरीज कांगो से यात्रा कर युगांडा पहुंचे थे. इसके अलावा, कांगो में संक्रमित हुए एक मेडिकल मिशनरी को इलाज के लिए जर्मनी ले जाया जा रहा है.
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस महामारी की शुरुआत अप्रैल के महीने में हुई थी और किसी अंतिम संस्कार या स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम के बाद यह संक्रमण 'सुपर-स्प्रेडर' घटना के रूप में तेजी से फैल गया.
इस बीच, यूरोपीय संघ ने यूरोप में इस वायरस के फैलने के जोखिम को बेहद कम बताया है और नागरिकों को सामान्य स्वास्थ्य सलाह का पालन करने की हिदायत दी है.