दुर्ग : पथरिया खदान में डूबने से 13 वर्षीय मासूम की मौत
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में नंदिनी थाना इलाके में स्थित पथरिया खदान के गहरे पानी में डूबने से एक 13 साल के बच्चे की जान चली गई. शुक्रवार की सुबह राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम ने कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद करीब 50 फीट की गहराई से बालक का शव बाहर निकाला. चौंकाने वाली बात यह है कि जब शव को पानी से निकाला गया, तो मृतक बच्चे के हाथ में कोल्ड ड्रिंक की एक खाली बोतल थी.
शुरुआती जांच और खदान के किनारे मिले फिसलने के निशानों को देखकर अंदेशा लगाया जा रहा है कि बोतल उठाने के चक्कर में बच्चा संतुलन खो बैठा और सीधे गहरे पानी में समा गया.
इस हृदयविदारक हादसे का शिकार हुआ बालक ग्राम पथरिया का रहने वाला आयुष मार्कंडेय (13) था, जिसके पिता का नाम नंदकुमार मार्कंडेय है. परिजनों ने बताया कि आयुष को खाली बोतलों के साथ खेलने की आदत थी.
वह गुरुवार की शाम करीब 4:30 बजे अचानक घर से निकला था, लेकिन जब देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो चिंतित परिवार ने इसकी जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी.
रात के वक्त खदान में भयंकर अंधेरा और पानी की अत्यधिक गहराई होने के कारण तुरंत रेस्क्यू शुरू करना मुमकिन नहीं था, इसलिए प्रशासन ने शुक्रवार की अलसुबह अभियान चलाने का फैसला किया.
जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में शुक्रवार सुबह 5:30 बजे एसडीआरएफ की 10 सदस्यीय टीम मौके पर तैनात की गई. टीम के डिप डाइविंग एक्सपर्ट राजकुमार यादव और चंद्रप्रताप जघेल ने अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे पानी में गोता लगाया.
करीब डेढ़ घंटे तक चले इस सघन खोज अभियान के बाद सुबह 7 बजे आयुष के शव को ढूंढ निकाला गया और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया. पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है और पोस्टमॉर्टम के बाद शव को रोते-बिलखते परिजनों के हवाले कर दिया.
इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों में खदान प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों का आरोप है कि इतनी खतरनाक और गहरी खदान होने के बावजूद यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं.
खदान क्षेत्र के चारों तरफ न तो कोई फेंसिंग की गई है और न ही लोगों को सचेत करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में इसी लापरवाही के कारण आए दिन ऐसे हादसों का डर बना रहता है.