अमेरिकी नाकाबंदी के कारण क्यूबा में चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू
हवाना । डेस्क: अमेरिकी तेल नाकाबंदी और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण क्यूबा इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. ट्रम्प प्रशासन द्वारा तेल आपूर्तिकर्ताओं पर लगाए गए नए प्रतिबंधों और वेनेजुएला से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित होने के बाद क्यूबा सरकार ने देश में 'ऊर्जा आपातकाल' घोषित कर दिया है.
स्थिति इतनी विकट हो गई है कि सरकार को बिजली बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना पड़ा है और सार्वजनिक परिवहन में भारी कटौती करनी पड़ी है.
क्यूबा के उप प्रधानमंत्री ऑस्कर पेरेज़-ओलिवा फ्रैगा ने सरकारी टेलीविजन पर घोषणा की कि देश की बुनियादी सेवाओं को बचाने के लिए ईंधन का राशनिंग किया जा रहा है. संकट का असर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी दिख रहा है.
ईंधन की कमी के कारण क्यूबा ने एक महीने के लिए विदेशी विमानों को जेट फ्यूल देने से मना कर दिया है, जिससे एयर फ्रांस जैसी बड़ी एयरलाइंस को अब ईंधन के लिए अन्य कैरिबियाई देशों में रुकना पड़ रहा है.
व्हाइट हाउस की ओर से बढ़ते दबाव और क्यूबा को "विफल राष्ट्र" बताए जाने के बीच हवाना ने शांतिपूर्ण संवाद की अपील की है, हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन वहां शासन परिवर्तन देखना चाहता है.
विशेषज्ञों और डेटा विश्लेषकों के अनुसार, क्यूबा के पास अब केवल कुछ ही दिनों का तेल भंडार बचा है, जिससे 1.1 करोड़ की आबादी वाले इस द्वीप पर मानवीय संकट का खतरा मंडरा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि यदि तेल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो देश की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है. फिलहाल, क्यूबा के लोग खाना पकाने के लिए कोयले और लकड़ी का सहारा ले रहे हैं, जबकि राजधानी सहित पूरे देश में घंटों बिजली कटौती और वीरान सड़कें इस गहराते संकट की गवाही दे रही हैं.