बंगाल में फिर 'दीदी' का धरना: चुनाव आयोग और बीजेपी के खिलाफ
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपने पुराने और सबसे विश्वसनीय राजनीतिक हथियार 'धरना' का सहारा लिया है. शुक्रवार को कोलकाता के धर्मतला स्थित मेट्रो चैनल पर ममता बनर्जी एसआईआर (SIR) पद्धति के विरोध और मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गईं.
लगभग दो दशक पहले इसी स्थान पर उन्होंने सिंगूर आंदोलन के दौरान 26 दिनों तक ऐतिहासिक अनशन किया था, जिसकी यादें शुक्रवार को मंच पर जय गोस्वामी और कबीर सुमन जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में ताजा हो गईं. मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई उनके लिए 'अस्तित्व और अधिकारों' की है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग को भी सीधे निशाने पर लिया है.
इस धरने की खास बात तृणमूल कांग्रेस के नए चेहरों और रणनीतियों का प्रदर्शन रही.
हाल ही में राज्यसभा के लिए नामित हुईं सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और पूर्व आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार मंच पर मुख्यमंत्री के साथ नजर आए. एक समय जिनके लिए ममता बनर्जी ने सीबीआई के खिलाफ धरना दिया था, वही राजीव कुमार अब सक्रिय राजनीति की दहलीज पर खड़े होकर ममता के धरने में शामिल हुए.
वहीं, पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 'बॉयकॉट बीजेपी' का नया नारा देते हुए आगामी चुनावों में भाजपा को 40 से 50 सीटों के नीचे समेटने का दावा किया.
हालांकि, इस दौरान मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर कुछ अंशकालिक शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन की कोशिश की, जिन्हें मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में शांत रहने की हिदायत दी. फिलहाल, ममता बनर्जी ने रात भी धरना मंच के पीछे बने अस्थायी पर्दे के घेरे में बिताने का फैसला किया है, जो उनके पुराने जुझारू तेवरों की वापसी का संकेत दे रहा है.