रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

जगदलपुर में 'बीजिंग से बस्तर तक' सवांद कार्यक्रम आयोजित

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर शांति समिति नामक संगठन की बैठक

C

CG Khabar

03 जून 2025, 01:39 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

बस्तर
बस्तर

जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर शांति समिति की दूसरी बैठक आयोजित की गई, जिसका नाम “माओवाद का विद्रूप चेहरा बीजिंग से बस्तर तक” संवाद रखा गया.


इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि पिछले चार दशकों में किस तरह से बस्तर में माओवाद ने बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया और इन घटनाओं में कितने लोगों की जानें गयीं, साथ ही पिछले कुछ महीनों में बस्तर में जवानों ने माओवाद पर अब तक का कैसे सबसे बड़ा प्रहार किया.

विज्ञापन


कई बड़े माओवादी फोर्स की गोलियों से मारे गए. जिसमें ये बताया गया कि माओवाद के चलते बस्तर में कितने घर उजड़ गए, कितने हजार निर्दोष मारे गए.


बस्तर शांति समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में द बस्तर फाइल्स और विवादित केरल स्टोरी फिल्म के निर्माता सुदीप्तो सेन, गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.


इस आयोजन में माओवादी हिंसा से पीड़ित व समर्पण कर चुके माओवादी भी पहुंचे. कई ने सरकारी आश्वासनों के बावजूद सुनवाई न होने की शिकायत की, आवेदन दिया. गृहमंत्री ने फिर से आश्वासन दिया.


दो साल बाद शांति समिति का कार्यक्रम

सरकार समर्थित बस्तर शांति समिति के नाम से इस संगठन की यह दूसरी बैठक थी. इसके पहले दो साल पहले इसी तरह कार्यक्रम रखा गया था. इस कार्यक्रम में शामिल हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद को सिर्फ बंदूक के दम पर खत्म नहीं किया जा सकता.


इसके लिए एक वैचारिक जंग भी लड़ना जरूरी है. यही वजह है कि जगदलपुर के टाऊन हॉल में बीजिंग से बस्तर तक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन बस्तर शांति समिति ने किया है.


उन्होंने कहा कि यहां यह बताया गया कि माओ को अपना आदर्श मानने वाले नक्सली किस तरह बस्तर में आदिवासियों का खून बहा रहे हैं.


सिर्फ हथियार के दम पर जवान माओवाद का खात्मा नहीं कर सकते, बल्कि इसके खात्मे के लिए इसके खिलाफ वैचारिक युद्ध भी जरूरी है.


माओवादियों से शांति वार्ता के लिए सरकार तैयार 

वहीं डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि जो ग्रामीण पहले माओवाद का साथ देते थे, अब वह समझ चुके हैं कि माओवाद ने उन्हें कितना नुकसान पहुंचाया है.


उन्होंने कहा कि नक्सलियों के पास सिर्फ एक ही विकल्प है कि वह आत्मसमर्पण करें, राज्य सरकार उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी और पुनर्वास नीति का लाभ देगी.


शर्मा ने कहा कि हैदराबाद में जो लोग शांति वार्ता के लिए टेबल टॉक कर रहे हैं उनसे बात ही नहीं हो सकती. उन्होंने बस्तर में नक्सलवाद को नहीं देखा है. वो केंद्र और राज्य सरकार को डायरेक्शन देना चाह रहे हैं, उनसे कभी बात नहीं हो सकती. शांति वार्ता के लिए जरूर माओवादी संगठन से बात हो सकती है.अगर वह आगे आना चाहें तो सरकार बातचीत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP