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दिल्ली प्रदूषण: चीन के 'ब्लू स्काई' मॉडल से भारत को सबक

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13 दिस. 2025, 01:08 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

दिल्ली प्रदूषण
दिल्ली प्रदूषण

नई दिल्ली । डेस्क: सर्दी की दस्तक के साथ ही राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का कहर फिर शुरू हो गया है. घने कोहरे और धुंध की चादर ने शहर को जकड़ लिया है, जहां कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 से 450 तक पहुंच गया है. यह स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत 'गंभीर' श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहा है. 


ठंडी हवा के कारण पटाखों का धुआं, पराली जलाना, भारी ट्रैफिक, वाहनों और उद्योगों के उत्सर्जन, सड़क धूल, निर्माण कार्य तथा कोयला-बायोमास हीटिंग का धुआं फंस जाता है, जिससे हवा जहर बन जाती है. भारत के दर्जनों शहरों में 'खराब' या 'बहुत खराब' वायु गुणवत्ता का सामना कर रहे हैं, लेकिन पड़ोसी चीन का अनुभव भारत के लिए एक मिसाल पेश करता है. बीजिंग ने सख्त नीतियों से प्रदूषण पर काबू पाया, बिना आर्थिक विकास को रोके.


बीस साल पहले बीजिंग को दुनिया की 'स्मॉग राजधानी' कहा जाता था. 2008 बीजिंग ओलंपिक के लिए अस्थायी उत्सर्जन कटौती नियमों ने प्रदूषण के खिलाफ युद्ध की नींव रखी. 2013 में पांच वर्षीय राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत कोयला-आधारित बॉयलर बंद करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, नई ऊर्जा वाहनों का प्रचार, उद्योगों में तकनीकी सुधार, नवाचार और हरित ऊर्जा पर जोर दिया गया. 


विशेष रूप से पीएम2.5 कणों पर निशाना साधा गया, जो 2.5 माइक्रोन से छोटे इन सूक्ष्म कणों को सांस के जरिए फेफड़ों में घुसने और खून में मिलने से सबसे बड़ा खतरा है. प्रारंभिक चेतावनी और आपात प्रतिक्रिया प्रणाली, प्रदूषण गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण, आबादी वाले इलाकों से कारखानों का स्थानांतरण तथा किसानों को कृषि जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन ने असर दिखाया. 2017 तक अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में 35 प्रतिशत सुधार हुआ.


बाद के वर्षों में बीजिंग ने अभियान जारी रखा. 2013 में औसत पीएम2.5 सांद्रता 72 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (μg/m³) से 2019 में घटकर 36 μg/m³ रह गई, जो 2024 में 29.3 μg/m³ हो गई. हालांकि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के 5 μg/m³ दिशानिर्देश से कहीं अधिक है, लेकिन चीन के प्रदूषण युद्ध में यह बड़ी सफलता है. महामारी के बावजूद 'ब्लू स्काई' अभियान चला, जिसमें निर्माण उत्सर्जन सीमित करना, स्वच्छ औद्योगिक तकनीकें अपनाना, स्टील उत्पादन घटाना, पुरानी गाड़ियां हटाना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना शामिल था. 


2025 के पहले तीन तिमाहियों में पीएम2.5 औसत 24.9 μg/m³ रहा, जो सरकारी आंकड़ों के अनुसार नीले आसमान की वापसी का संकेत है. 2022 में पूरे चीन में औसत पीएम2.5 29 μg/m³ गिरा, और 339 शहरों में अच्छी वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या 316 पहुंची. वैश्विक स्तर पर बढ़ते पीएम2.5 के बीच चीन की कटौती इतनी गहरी थी कि उसने अकेले वैश्विक प्रदूषण में कमी लाई.


स्वतंत्र शोध इसकी पुष्टि करते हैं. एशियाई विकास बैंक के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच ग्रेटर बीजिंग-तियानजिन-हेबेई क्षेत्र में पीएम2.5 44.2 प्रतिशत, सल्फर डाइऑक्साइड 76.3 प्रतिशत और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड 34.8 प्रतिशत कम हुआ, जबकि अच्छी वायु गुणवत्ता वाले दिनों का हिस्सा 63.1 प्रतिशत हो गया. 


विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के पर्यावरण ढांचे ने अंतर-क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाया और उद्योगों को सक्रिय बनाया. दुनिया का सबसे बड़ा नई ऊर्जा औद्योगिक चेन विकसित कर बीजिंग ने नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों में नेतृत्व किया, जो वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का केंद्र है. 2013 से 2024 तक जीडीपी 73 प्रतिशत बढ़ी, जबकि जनवरी-सितंबर 2024 में पीएम2.5 26 μg/m³ रह गया, जो दर्शाता है कि नीति-आधारित दृष्टिकोण से विकास और स्वच्छ हवा दोनों संभव हैं.


वायु प्रदूषण सबसे बड़ा पर्यावरणीय स्वास्थ्य जोखिम है, जो सीमाओं को नहीं मानता, जलवायु परिवर्तन बढ़ाता है, आर्थिक नुकसान पहुंचाता है और कृषि उत्पादकता घटाता है. 2024 में चीन के तीन-चौथाई शहरों ने पीएम2.5 लक्ष्य हासिल किया, लेकिन कई क्षेत्रों में पुनरुत्थान हो रहा है, जिससे बीजिंग को उपाय मजबूत करने पड़ रहे हैं. 


दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के देशों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत है. भारत, जो दशक भर पहले चीन की तरह तेज विकास और शहरीकरण से जूझ रहा है, को चीन से सीखना चाहिए. अत्यधिक प्रदूषक कारखाने बंद करना, इलेक्ट्रिक बस फ्लीट बढ़ाना, निर्माण स्थलों पर रीयल-टाइम धूल निगरानी और अंतर-प्रांतीय समन्वय से भारत स्वच्छ हवा और सतत विकास की दिशा में प्रगति कर सकता है. यह न केवल दिल्लीवासियों की सेहत सुधारेगा, बल्कि आर्थिक लक्ष्यों को भी मजबूत करेगा.

(Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP