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लिव-इन पार्टनर को भी मिल सकता है फैमिली पेंशन का हक- HC

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10 जन. 2026, 03:00 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

हाईकोर्ट
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नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की लिव-इन पार्टनर और उनके बच्चों को पारिवारिक पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ देने पर विचार करे. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की पेंशन को स्थायी रूप से रोकने या उनके आश्रितों को लाभ से वंचित करने का कोई वैध आधार नहीं है.


न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के 2018 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारी की 50 प्रतिशत पेंशन और ग्रेच्युटी रोकने के फैसले को सही ठहराया गया था. 

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यह मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा है जो 1983 से अपनी लिव-इन पार्टनर के साथ रह रहा था और जिनसे उनके दो बच्चे हैं. कर्मचारी पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पार्टनर और बच्चों के लिए राजनयिक पासपोर्ट प्राप्त करने हेतु गलत जानकारी दी थी.


अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी सेवा के दौरान अपनी पत्नी की अनुपस्थिति और अपने लिव-इन रिश्ते के बारे में विभाग को सूचित किया था, इसलिए इसमें किसी भी तरह की धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने की मंशा नजर नहीं आती. 


कोर्ट ने जोर देकर कहा कि 40 साल से अधिक पुराने इस रिश्ते और बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें पेंशनरी लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP