दिल्ली कोर्ट का ED को झटका: कहा- कानून से बाहर जाकर काम नहीं कर सकती एजेंसी
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है. राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धीरज मोर ने 6 मार्च को दिए अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ईडी उन शक्तियों को नहीं हड़प सकती जो कानून ने उसे नहीं दी हैं.
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला ईडी द्वारा अधिकार क्षेत्र के गलत इस्तेमाल का एक "शास्त्रीय उदाहरण" है, क्योंकि रिकॉर्ड पर मौजूद सभी साक्ष्य एजेंसी के दावों के खिलाफ जाते हैं.
यह मामला राठी स्टील एंड पावर लिमिटेड (RSPL) और उसके अधिकारियों द्वारा 2008 में छत्तीसगढ़ के केसाला उत्तर कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए कथित तौर पर गलत जानकारी देने से जुड़ा था.
अदालत ने अपने फैसले में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 के तहत अपराध का आधार 'अपराध की कमाई' का होना है, जिसे इस मामले में स्थापित नहीं किया जा सका.
न्यायाधीश ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन पत्र अपने आप में 'अपराध की कमाई' नहीं माना जा सकता, जब तक कि उससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई वित्तीय लाभ न हुआ हो.
अदालत ने ईडी के उन तर्कों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने आवंटन पत्र के आधार पर शेयर पूंजी बढ़ाकर 3.08 करोड़ रुपये जुटाए.
न्यायाधीश ने पाया कि आवंटन के बाद कंपनी के शेयरों की कीमत बढ़ने के बजाय गिरी थी, जो दर्शाता है कि शेयर की कीमतें बाजार की शक्तियों पर निर्भर थीं न कि कोयला आवंटन पर. अंत में, अदालत ने ईडी के पूरे मामले को "निराधार मान्यताओं, भ्रमों और अनुमानों" पर आधारित बताते हुए आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी.