दंतेवाड़ा: पहली बार 22 से अधिक छात्रों को मिलेगा MBBS में दाखिला
दंतेवाड़ा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और जनजातीय बहुल जिले दंतेवाड़ा से शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी विज्ञान शिक्षा पहल 'छू लो आसमान' ने नीट (NEET) 2026 की परीक्षा में अब तक का अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है.
वर्तमान काउंसलिंग रुझानों और कट-ऑफ को देखते हुए अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस परियोजना से जुड़े 22 से अधिक आदिवासी व स्थानीय छात्र इस बार मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों पर दाखिला हासिल करेंगे. वर्ष 2011 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
एक दौर था जब दंतेवाड़ा जिले में विज्ञान शिक्षकों की भारी कमी हुआ करती थी, जिसके चलते स्थानीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए विज्ञान की उच्च शिक्षा और डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना बेहद मुश्किल था. जिला प्रशासन की इस विशेष पहल ने अब इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है.
इस साल इस कार्यक्रम के तहत कुल 158 छात्रों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) दी थी, जिनमें से अधिकांश छात्र आदिवासी समुदायों से आते हैं. परीक्षा में 21 छात्रों ने 300 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जिससे वे काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से एमबीबीएस और अन्य संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए मजबूत स्थिति में आ गए हैं.
दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इस बैच के सर्वोच्च स्कोरर ने 509 अंक हासिल किए हैं.
यह अभियान न केवल भविष्य के डॉक्टर तैयार कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली को भी मजबूत बना रहा है. अब तक 'छू लो आसमान' के 6 पूर्व छात्र अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर दंतेवाड़ा के ही विभिन्न सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश ध्रुव ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय जिला प्रशासन की सटीक रणनीति, मेंटर्स के समर्पण और छात्रों के कड़े परिश्रम को दिया है. उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बाद भी छात्रों ने अपने सपनों से ध्यान नहीं भटकाया.
दंतेवाड़ा अब न सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर बना रहा है, बल्कि अपने ही आदिवासी समाज के भीतर से रोल मॉडल भी तैयार कर रहा है. यह सफलता साबित करती है कि शिक्षा में निरंतर निवेश से पूरे जिले का भविष्य बदला जा सकता है.
आगामी वर्षों में इस सफलता दर को और बेहतर करने के लिए जिला प्रशासन अब 200 से कम अंक पाने वाले छात्रों के लिए विशेष उपचारात्मक कोचिंग, अतिरिक्त मॉक टेस्ट और गहन मार्गदर्शन कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है.