अमेरिकी दबाव से ताइवान के चिप उद्योग पर मंडराया संकट
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका ने हाल के हफ्तों में ताइवान के सेमिकंडक्टर उद्योग पर दबाव काफी बढ़ा दिया है, ताकि उन्नत चिप्स का निर्माण अमेरिकी धरती पर किया जा सके. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनुमान जताया है कि उनके कार्यकाल के अंत तक दुनिया के कुल सेमिकंडक्टर उत्पादन का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका में केंद्रित हो जाएगा.
इसी दबाव के बीच दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी 'ताइवान सेमिकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी' (TSMC) ने अमेरिका के एरिजोना राज्य में 100 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी इससे पहले भी अमेरिका में 165 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर चुकी थी. इस नए संकल्प के साथ ही अमेरिका में TSMC का कुल प्रतिबद्ध निवेश बढ़कर 265 अरब डॉलर के आंकड़े को छू गया है.
हालांकि, ताइवान की इस विनिर्माण क्षमता को अमेरिकी धरती पर ले जाने से ताइवान के अपने घरेलू चिप उद्योग के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक फायदे के लिए व्यापारिक समुदाय के हितों की बलि देकर ताइवान की 'डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी' (DPP) सरकार न केवल इस ऐतिहासिक उद्योग के भविष्य को जोखिम में डाल रही है, बल्कि देश के लाखों लोगों की आजीविका को भी अनिश्चितता की ओर धकेल रही है.