क्या इजरायल, ईरान पर परमाणु बम से हमला कर सकता है?
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा है, क्या यह संघर्ष परमाणु प्रलय में बदल सकता है? शनिवार को ईरान द्वारा इजरायल के डिमोना शहर जहाँ इजरायल का मुख्य परमाणु केंद्र स्थित है पर किए गए मिसाइल हमले ने इस चर्चा को और हवा दे दी है. यह हमला ईरान के नतान्ज परमाणु संयंत्र पर हुए हमले के जवाब में था. इस तनावपूर्ण माहौल में अब हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या इजरायल वास्तव में ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्या इजरायल के पास वास्तव में परमाणु बम हैं. आधिकारिक तौर पर इजरायल ने कभी इसे स्वीकार नहीं किया है, लेकिन स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) जैसे वैश्विक सुरक्षा संस्थानों का मानना है कि इजरायल के पास लगभग 80 से 90 परमाणु हथियार हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल के पास जमीन से मार करने वाली जेरिको मिसाइलें, विमान और पनडुब्बियां हैं जो परमाणु हमला करने में सक्षम हैं. इजरायल की इस रणनीति को 'परमाणु अस्पष्टता' (Nuclear Opacity) कहा जाता है, जहाँ वह न तो पुष्टि करता है और न ही इनकार, ताकि दुश्मनों के मन में अनिश्चितता और डर बना रहे.
इजरायल की मानसिकता को समझने के लिए 'सैमसन ऑप्शन' (Samson Option) को जानना अनिवार्य है. यह एक ऐसी सैन्य रणनीति मानी जाती है जिसके तहत यदि इजरायल को लगता है कि उसका अस्तित्व खतरे में है और वह पारंपरिक युद्ध हार रहा है, तो वह अंतिम विकल्प के रूप में परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है. इजरायल के लिए यह युद्ध केवल क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई नहीं बल्कि 'राष्ट्रीय अस्तित्व' का सवाल है.
वर्तमान इजरायली सरकार, जिसे देश के इतिहास की सबसे कट्टरपंथी सरकार कहा जा रहा है, के कुछ मंत्रियों ने पूर्व में भी गाजा और क्षेत्रीय दुश्मनों के खिलाफ सख्त लहजे में परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग का संकेत दिया है. जब कोई देश अपने अस्तित्व को खतरे में पाता है, तो परमाणु हमला करने की मनोवैज्ञानिक बाधा काफी कम हो जाती है.
इस पूरी स्थिति में अमेरिका का रुख सबसे महत्वपूर्ण है. ऐतिहासिक रूप से अमेरिका ने इजरायल की परमाणु नीति पर चुप्पी साधे रखी है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका बचाव किया है. वर्तमान में, अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं.
हालांकि, अमेरिका एक व्यापक परमाणु युद्ध को टालना चाहेगा, लेकिन यदि ईरान की ओर से इजरायल के परमाणु केंद्रों पर सीधे हमले जारी रहते हैं, तो अमेरिका के लिए इजरायल को रोकना मुश्किल हो जाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान पर 'अधिकतम दबाव' की नीति अपनाई है, जो कभी-कभी सैन्य टकराव के जोखिम को और बढ़ा देती है.
इजरायल द्वारा परमाणु हमले की संभावना अब केवल एक किताबी सिद्धांत नहीं रह गई है. ईरान द्वारा डिमोना जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाना इजरायल की 'रेड लाइन' को पार करने जैसा है.
यदि युद्ध की स्थिति ऐसी बनती है जहाँ इजरायल खुद को चारों ओर से घिरा और अस्तित्व के संकट में पाता है, तो 'सैमसन ऑप्शन' के तहत वह परमाणु हथियारों का उपयोग करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है. यह स्थिति न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया को एक विनाशकारी परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर सकती है.