NCERT की नई किताबों में 'सैन्य राष्ट्रवाद' पर विवाद
कोलकाता । डेस्क: टेलीग्राफ इंडिया के हवाले से खबर है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा पिछले दो वर्षों में कक्षा 6 से 9 के लिए तैयार की गई नई अंग्रेजी पाठ्यपुस्तकों 'पूर्वी' और 'कावेरी' की विषयवस्तु को लेकर शिक्षा जगत में बहस छिड़ गई है. शिक्षा विशेषज्ञों का आरोप है कि इन किताबों में प्रसिद्ध और स्थापित लेखकों के मूल साहित्य को दरकिनार कर पाठ्यपुस्तक विकास समिति के सदस्यों द्वारा स्वयं लिखी गई 'बनावटी' (Contrived) कहानियों और कविताओं को जगह दी गई है.
इन रचनाओं में 'सैन्य राष्ट्रवाद', युद्ध के गौरव और सरकारी योजनाओं के प्रचार पर अत्यधिक जोर दिया गया है, जिसे विशेषज्ञ भाषा सीखने की दृष्टि से अनुपयुक्त मान रहे हैं.
विशेषज्ञों ने विशेष रूप से कक्षा 6 की कविता 'नेशनल वॉर मेमोरियल', कक्षा 7 में सैनिकों को श्रद्धांजलि देने वाले पाठ और कक्षा 8 में मेजर सोमनाथ शर्मा पर आधारित सामग्री पर सवाल उठाए हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की पूर्व डीन प्रोफेसर अनीता रामपाल का कहना है कि 2005 के नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के दौरान यह तय किया गया था कि भाषा की किताबों में केवल प्रतिष्ठित लेखकों की प्रामाणिक रचनाओं का उपयोग किया जाएगा, क्योंकि समिति के सदस्य साहित्यिक विशेषज्ञ नहीं होते.
उनका तर्क है कि वर्तमान किताबों में शामिल सामग्री 'उपदेशात्मक' और 'आदेशात्मक' है, जिसमें साहित्यिक सौंदर्य का अभाव है.
प्रोफेसर रामपाल के अनुसार, 10 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए उपयोग की गई भाषा और विषय काफी जटिल हैं, जिन्हें समझना उनके मानसिक स्तर के लिए कठिन हो सकता है.
आरोप है कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' और योग जैसे विषयों पर केंद्रित ये पाठ आलोचनात्मक सोच विकसित करने के बजाय एक खास विचारधारा को बढ़ावा देते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रामाणिक साहित्य बच्चों को भाषा की बारीकियां और विभिन्न शैलियों को समझने में मदद करता है, जबकि स्वयं निर्मित सामग्री केवल सूचनात्मक या प्रचारक बनकर रह जाती है. इस गंभीर विषय पर स्पष्टीकरण के लिए NCERT के निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी को टेलीग्राफ इंडिया द्वारा ईमेल भेजा गया है, जिनका आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है.